16 साल तक अन्न न खाने वाली और अपने साथ ही मानव अधिकारों को लेकर लड़ने वाली मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने शादी करने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत जल्दी ही इरोम एक ब्रिटिश नागरिक से शादी करेंगी।
Indian Expressमीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने बीते बुधवार (12 जुलाई) को अपनी शादी के लिए सभी जरूरी कागजात कोडैकानल में सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जमा कराए हैं। इरोम की शादी डेसमंड कूटिन्हो नाम के एक ब्रिटिश नागरिक होने जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इरोम ने रजिस्ट्रार ऑफिस में अपनी शादी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दफ्तर में लगभघ 2 घंटे बिताए।
शादी के लिए थोड़ा और करना पड़ेगा इंतजार
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, इरोम को शादी के लिए कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। सब रजिस्ट्रार के मुताबिक, वह उन्हें तुरंत शादी की इजाजत नहीं दे सकते। क्योंकि यह शादी अंतर-धार्मिक हो रहा है। रजिस्ट्रार ने बताया कि कानूनी तौर पर अंतर-धार्मिक विवाह हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि शादी के लिए दोनों को स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसमें 30 दिन तक का समय लग सकता है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, शादी की रजिस्ट्रेशन की तारीख के बारे में पुलिस ने भी जानकारी मांगी है। पुलिस इरोम को लंबे समय से मॉनिटर करती आ रही है।
16 साल तक किया अनशन
आपको बता दे कि इंफाल की रहने वाली इरोम शर्मिला ने 16 साल का अनशन खत्म करने के बाद पीपुल्स रिसरजेंस एंड जस्टिस एलायंस(पीआरजेए) का गठन किया था। इरोम शर्मिला ने 16 साल तक विवादित ऑर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स एक्ट का विरोध किया था। इसके बाद पिछले साल 9 अगस्त 2016 को उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर लिया था।
90 वोट मिलने के बाद राजनीति से लिया संन्यास
16 साल तक मणिपुर की जनता के लिए अनशन करने वाली इरोम शर्मिला का राजनीतिक कॅरियर 11 मार्च को विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद महज 144 दिन में ही खत्म हो गया। दरअसल, पीपुल्स रिसर्जेजेंस एंड जस्टिस अलायंस (पीआरएजेए) की उम्मीदवार इरोम शर्मिला बुरी तरह से चुनाव हार गईं।
मणिपुर की थउबल सीट से पीपुल्स रिसर्जेजेंस एंड जस्टिस अलायंस की प्रत्याशी इरोम मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ लड़ रही थीं। लेकिन उन्हें सिर्फ 90 वोट मिले। इससे ज्यादा 143 वोट तो नोटा (वैसे मतदाता जिन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं था) को मिले। इस शर्मनाक हार के बाद शर्मिला ने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया।