हिज्बुल मुजाहिदीन ने कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए घाटी में वापस लौटने के लिए कहा

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आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन ने 1990 में आतंकवाद की शुरुआत पर घाटी से विस्थापित होने को मजबूर हुए कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए उन्हें अपने घरों में वापस लौटने के लिए कहा है। संगठन ने कहा कि वह सिख युवकों का एक अलग समूह बनाने की योजना बना रहा है।

इस संगठन का स्वयंभू कमांडर जाकिर रशीद भट उर्फ ‘मूसा’ ने एक संक्षिप्त वीडियो संदेश में कहा, ‘हम कश्मीरी पंडितों से अपने अपने घरों में वापस लौटने का आग्रह करते हैं। हम उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं।’

Photo courtesy: indian express

गौरतलब है कि आतंकवाद के पैर पसारने पर आतंकवादी संगठनों द्वारा कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाए जाने के बाद हजारों कश्मीर पंडित घाटी छोड़ने के लिए मजबूर हुए थे और तभी से वे जम्मू तथा देश के अन्य भागों में रह रहे हैं।

वहीं मारे जा चुके आतंकवादी बुरहान वानी के ‘उत्तराधिकारी’ ने कहा, ‘उन्हें उन पंडितों को देखना चाहिए जो कभी कश्मीर छोड़कर नहीं गए. उन्हें परेशान या उनकी हत्या किसने की?’ वीडियो में सैन्य पोशाक और एक हथगोले के साथ खेलते नजर आए भट ने एक अनोखी दलील दी कि मुस्लिमों को निशाना बनाने की योजनाबद्ध रणनीति के तहत पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

भाषा की खबर के अनुसार, भट ने पंजाब के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग का कोर्स बीच में छोड़ दिया था और कुछ साल पहले हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था. उसने दावा किया कि सरकार पंजाब में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की तरह एक अभियान में घाटी में कार्रवाई की योजना बना रही है।

भट ने 1.38 मिनट के वीडियो में खुलासा किया कि वह संगठन में सिख युवकों के लिए एक अलग समूह बनाने की योजना बना रहा है. उसने कहा, ‘हमारे सिख भाई हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल होने के लिए हमसे आग्रह कर रहे हैं… हम हर मोर्चे पर उनके साथ हैं और इंशाअल्लाह, हम संगठन में सिखों के लिए एक विशेष समूह बनाने की कोशिश करेंगे और इसे बनाएंगे।’

घाटी खासकर दक्षिण कश्मीर के जिलों में हथियार छीनने की ताजा घटनाओं के बारे में भट ने कहा, ‘कई युवकों ने जिहाद का रास्ता अपनाया है, हथियार छीनकर वे हमारे समूह में शामिल हुए.’ किसी अज्ञात जगह पर बनाए गए इस वीडियो में धार्मिक नारों वाले दो हरे बैनर और उसके पीछे दोनों तरफ हथियार देखे जा सकते हैं।

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