चुनाव आयोग की सख्त हिदायतों के बाद भी सोशल मीडिया पर मुसलमानों का डर दिखाकर नफरत फैलाने वाले वीडियो का अपलोड होना जारी है। इस तरह के वीडियो एक वर्ग विशेष को समाज का दुश्मन दिखाकर नफरत फैलायी जा रही है जबकि वीडियो में संदेश दिया जा रहा है कि मुसलमानों से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि मोदी हमारे साथ है। प्रधानमंत्री मोदी का नाम जोड़कर इस तरह के वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कराया जा रहा है।
Photo Courtesy: NewsXइस वीडियो की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली। ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (HRLN) में मानव अधिकारों के वकील गोविंद परमार ने चुनाव आयोग व गुजरात पुलिस को पत्र लिखकर इस वीडियो क्लिप का प्रसार रोकने को कहा है। परमार का कहना है कि इस क्लिप का इस्तेमाल राज्य में वोटों के धुव्रीकरण और मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए हो सकता है।
गुजराती भाषा में बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है जिसे खूब तेजी के साथ शेयर किया जा रहा है। वीडियो में दिखाया गया है कि एक घबराई हुई लड़की एक मौहल्ले से गुजर रही है वहां अजान की आवाज सुनाई दे रही है। लड़की को डर है कि उसके साथ यहां कुछ घटना न हो जाए जबकि दूसरी तरफ इस वीडियो के विज्ञापन में उसके घर के दृश्यों को दिखाया गया है जहां उसके माता-पिता अपनी लड़की का इंतजार कर रहे है। घर में भगवान कृष्ण की फोटो टंगी है। जब लड़की घर पहुंचती है तो घरवाले को बताती है कि 22 साल पहले, ऐसा हुआ करता था। और ऐसा फिर हो सकता है अगर वो लोग आए तो।” फिर लड़की बोलती है, ”परेशान मत हो। कोई नहीं आएगा। क्योंकि यहां मोदी है।
वीडियो के माध्यम से साम्प्रदायिकता का जहर फैला कर एक वर्ग विशेष को इस प्रकार से चित्रित करने को लेकर वकील परमार का कहना है, ”यह साफ है कि वीडियो का मकसद बहुसंख्यकों में मुस्लिमों के प्रति डर फैलाना है। यह वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया गया है, जो कि एक अपराध है। मैंन पोस्ट से और ई-मेल से चुनाव आयोग और क्राइम ब्रांच को शिकायत भेजी है।” इस बार में एडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर एल पी पदलिया ने कहा, ‘(अभी तक) हमें कोई शिकायत नहीं मिली है’।