शहीद हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र, अकेले मार गिराए थे 4 आतंकी

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68वें गणतंत्र दिवस के मौके पर गुरुवार को राष्ट्रीय राइफल्स के हवलदार हंगपन दादा को सेना के सर्वोच्च शांतिकालीन पुरस्कार अशोक चक्र से नवाजा गया। हंगपन दादा की पत्नी श्रीमति चासेल लवांग ने सम्मान स्वीकार किया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शहीद हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। वह मई 2016 में जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हंगपन की पत्नी को 26 जनवरी की परेड के दौरान इस सम्मान से नवाज़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कश्मीर के कुपवाड़ा में 27 मई को करीब 12500 फीट पर कुछ आतंकवादी सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। 36 साल के दादा ने इन आतंकियों का मुकाबला बड़ी बहादुरी से किया।

अरुणाचल प्रदेश के बोदुरिया गांव के रहने वाले हवलदार हंगपन अपनी टीम में ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय थे। साल 1997 में सेना की असम रेजीमेंट में शामिल किए गए दादा को 35 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किया गया था।

 

 

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