स्टिंग ऑपरेशन में नाम आने के एक दिन बाद CM योगी के गढ़ में BJP को हराकर ‘हीरो’ बने सपा सांसद प्रवीण निषाद ने थामा ‘कमल’, कालाधन मांगते चैनल के कैमरे में हुए थे कैद

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आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यूपी के सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को बड़ा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी (सपा) से गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद गुरुवार (4 अप्रैल) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। साथ ही एक बड़े राजनैतिक घटनाक्रम में निषाद पार्टी ने भी एनडीए के साथ गठबंधन कर लिया है। निषाद पार्टी अभी हाल में ही सपा से अलग हुई है। प्रवीण निषाद पिछले साल लोकसभा उपचुनाव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी को हराकर देशभर में सुर्खियां बटोरी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया कि वह गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे या किसी अन्य सीट से।

पिछले साल हुए गोरखपुर उपचुनाव में सपा ने निषाद पार्टी से गठबंधन कर प्रवीण निषाद को अपने संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर उतारा था, तब उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ला को हराया था। प्रवीण निषाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शुक्ला को 21 हजार 881 मतों से हराया था। उस समय प्रवीण निषाद को सपा, बसपा सहित अन्य सभी विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सीट से सांसद रहे हैं और 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको सांसद का पद छोड़ना पड़ गया था।

बता दें कि हाल ही में प्रवीण निषाद के पिता और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उन्होंने तब सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना भी साधा था।प्रवीण निषाद की बीजेपी से करीबी बढ़ने की खबरों के बाद सपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गोरखपुर से उनका टिकट काट दिया था। सपा ने यहां से रामभुआल निषाद को उम्मीदवार बनाया है।

योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट मानी जाती रही गोरखपुर उपचुनाव में हार बीजेपी के लिए सबसे बड़ा झटका था। इस सीट पर वर्ष 1991 से लगातार बीजेपी की जीत के रिकॉर्ड को सपा के प्रवीण निषाद ने ध्वस्त कर दिया था। गोरखपुर में 1989, 1991 और 1996 में महंत अवेद्यनाथ और 1998 से 2014 तक योगी आदित्यनाथ को कोई चुनौती नहीं मिल सकी। पिछले लोकसभा चुनाव में योगी तीन लाख 12 हजार मतों से जीते थे लेकिन, जब उनकी सर्वाधिक कठिन परीक्षा थी तब बीजेपी को शर्मनाक हार मिली।

चैनल के स्टिंग में काले धन के इस्तेमाल में फंसे

बता दें कि एक दिन पहले ही बुधवार (3 अप्रैल) को समाचार चैनल TV 9 भारतवर्ष के एक स्टिंग ऑपरेशन में प्रवीण निषाद का नाम आया था। चैनल ने दावा किया है कि उसके स्टिंग ऑपरेशन में निषाद ने करोड़ों रुपये का कालाधन खर्च करने की बात कबूल करते कैद हो गए हैं। चैनल के अंडरकवर रिपोर्टर्स ने प्रवीन निषाद के घर पहुंचकर बताया कि वो राजनीतिक फंड देने वाली कंपनियों से जुड़े हैं। लिहाजा उन्हें चुनाव में करोड़ों रुपये कालाधन मिल सकता है। ये सुनते ही निषाद बताने लगे कि 2018 के उपचुनाव में कैसे उन्होंने दोनों हाथों से करोड़ों का कालधन लुटाया था।

रिपोर्टर ने जब गोरखपुर में चुनाव में होने वाले खर्च के बारे में पूछा तो निषाद ने बताया कि लगभग 5-6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। फंडिंग के सवाल पर निषाद ने कहा कि जितनी फंडिंग आप करा सकते हैं उतनी करा दीजिए, जिसपर निषाद ने कहा कि जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके उतनी करा दीजिए, क्योंकि हमारे पास 2 लोकसभा सीट हैं। एक गोरखपुर और दूसरी पिताजी की महाराजगंज सीट।

एक रैली में 60-70 लाख रुपये होते हैं खर्च

चैनल के मुताबिक, पिछले चुनाव में हुए खर्च के बारे में पूछे जाने पर प्रवीण निषाद ने बताया कि 7-8 करोड़ खर्च हो गए थे। जिसमें लगभग 3.50 करोड़ हमने खर्च किया और चार करोड़ के आसपास पार्टी ने किया था। मैनेज करने के तरीकों पर बताते हुए निषाद ने बताया कि रैलियों में गाड़ी करवाते हैं तो तकरीबन 60-80 लाख रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा नौजवानों को टी-शर्ट, महिलाओं को साड़ियां भी बांटी जाती हैं। नोटबंदी के बाद कैश मैनेज करने के लिए प्रवीण निषाद ने बताया कि इसके लिए पार्टी का अकाउंट होता है।

इसके अलावा थर्ड पार्टी का अकाउंट भी होता है और ट्रस्ट से भी मैनेज किया जाता। पैसा देने की बात पर निषाद ने कहा कि हमें कैश दीजिए अगर चेक से जाएगा तो वो तो ऑन रिकॉर्ड होगा, कैश रहेगा तो कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा। कालेधन  के लिए निषाद की बेचैनी ऐसी थी कि वो न केवल फौरन बताई हुई फर्जी कंपनी से मीटिंग के लिए तैयार हो गए, बल्कि चुनाव का हवाला देकर जल्दी मीटिंग का दबाव भी बनाने लगे।

 

 

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