प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद से देश के लिए खबरे सकारात्मक नहीं आ रहीं है वो खबर चाहे नोटबंदी के कारण होने वाली मौत की खबरे हो या रैटिंग एजेंसी में भारत की घटती रैटिंग।
विश्व बैंक ने नोटबंदी के प्रभाव का हवाला देते हुए जहां मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर संबंधी अपने अनुमान को घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। दूसरी और फिच रेटिंग ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए भारत की रेटिंग घटाकर 6.9 फीसदी कर दी है जो पहले 7.4 फीसदी थी।
समाचार एजेंसी आईएनएस की खबर के अनुसार, फिच रेटिंग ने मंगलवार को जारी अपने न्यूजलेटर में कहा, “नोटबंदी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में अल्पकालिक खलल आया है, जिसके कारण हमें विकास दर का पूर्वानुमान घटाना पड़ा है।
आगे कहा, “हालांकि इस कदम से कुछ लाभ की संभावना है, लेकिन यह इतना सकारात्मक नहीं है कि सरकार के वित्तीय और मध्यम अवधि विकास दर में कोई बदलाव ला सके। नोटबंदी के असर जितने दिन तक जारी रहेगा, उतना ही इसका अर्थव्यवस्था पर असर होगा।
इसलिए फिच ने 31 मार्च को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान पूर्व के 7.4 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है।
“नोटबंदी के कारण लोगों के पास नकदी की भारी कमी हो गई। दूसरी तरफ किसानों के पास भी खाद-बीज खरीदने के पैसे नहीं हैं। इससे समूची आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुए और लोगों के बैंकों की कतार में खड़े होने से उत्पादक कार्य का समय भी बरबाद हुआ।”
फिच ने कहा कि हालांकि नोटबंदी के पीछे की मंशा सकारात्मक थी और व्यापक सुधार के प्रयासों को ध्यान में रखकर की गई थी। लेकिन इससे अनिश्चित दीर्घावधि लाभ की तुलना में कहीं ज्यादा अल्पकालिक नुकसान हुआ। नोटबंदी के कारण उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि नकदी की कमी के कारण उपभोक्ताओं ने अपने खर्च में काफी कटौती की। जेएम फाइनेंसियल की रिपोर्ट में यह बातें कही गई है।
वित्तीय सेवा कंपनी ने एक बयान में कहा, नोटबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर में सभी किस्म के कारोबार पर पानी फिर गया।