90 साल के महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो हवाना में निधन हो गया। कास्त्रों ने लगभाग 50 साल तक क्यूबा की सत्ता संभाली। उसके बाद 2008 में उन्होंने अपने भाई राउल को आगे कर दिया। कास्त्रो का जन्म 13 जुलाई 1926 को पूर्वी क्यूबा के बीरन में हुआ। उनके पिता एंजेल उत्तरी स्पेन के गैलिसिया क्षेत्र से क्यूबा आए थे।
गन्ने के खेतों में हैती के मजदूरों पर होने वाले अत्याचारों ने फिदेल कास्त्रो को क्रांति की ओर खींचा। कास्त्रो ने 1953 में भ्रष्ट तानाशाह बतिस्ता के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक दिया। क्रांति असफल रही और उन्हें 15 साल की सजा देकर जेल में डाल दिया गया। लेकिन दो साल बाद ही उन्हें रिहा कर दिया गया। कास्त्रो ने चे ग्वेवारा के साथ मिलकर बतिस्ता के खिलाफ गुरिल्ला लड़ाई छेड़ दी। 1959 में उन्होंने बतिस्ता को खदेड़ दिया। इसी साल वे प्रधानमंत्री बन गए। बाद में 1976 में वे राष्ट्रपति बन गए।
कास्त्रो की कहीं गई बातें आज इतिहास में दर्ज है। उन्होंने 1959 में कहा था कि क्रांति कोई गुलाबों का बिस्तर नहीं होती। यह भूत और भविष्य के बीच का संघर्ष है। टाइम मैगजीन ने 2012 में 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों में कास्त्रो को शामिल किया था।
21 जुलाई, 2006 में अर्जेंटीना में लातिन अमेरिकी देशों के सम्मेलन में कास्त्रो ने कहा था कि मैं 80 साल का होने पर बहुत खुश हूं। मैंने ऐसा कभी सोचा था, खासकर एक ऐसे पड़ोसी के होते हुए, जो हर दिन मुझे मारने की कोशिश कर रहा है।
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से भी प्रभावित थे कास्त्रो। 1973 और 1983 में भारत भी आए थे। वियतनाम यात्रा के दौरान फिदेल सितंबर, 1973 में भारत भी आए थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनका जोरदार स्वागत किया था। बराक ओबामा की क्यूबा यात्रा के दौरान कास्त्रो ने ओबामा से मिलने से इनकार कर दिया था।
कास्त्रो को सिगार पीने का बहुत शौक था। लेकिन 1985 में उन्होंने सिगार छोड़ दी थी। सिगार छोड़ते हुए उन्होंने कहा था, ‘सिगार के बॉक्स के साथ सबसे अच्छी चीज जो तुम कर सकते हो वो है कि इसे अपने दुश्मन को दे दो।’
कास्त्रो को क्यूबा में कम्युनिस्ट क्रांति का जनक माना जाता है और उन्होंने 49 साल तक क्यूबा में शासन किया था। वह फरवरी 1959 से दिसंबर 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और फिर फरवरी 2008 तक राष्ट्रपति रहे। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया और उनके भाई राउल कास्त्रो को यह पदभार मिला।