पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वे जुड़े हुए थे वह अब भी अधूरी है और देश की सामाजिक व आर्थिक नीति के नए डिजाइन के लिए नए सोच की जरूरत है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेंगलुरु डॉ बी आर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकनामिक्स में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसी नीति की जरुरत है जिसमें आर्थिक विकास की ऊंची दरें हासिल करने के साथ आर्थिक असमानता को काबू करने पर फोकस हो। जिन आर्थिक सुधारों से वह जुड़े थे उनका मकसद सामाजिक और आर्थिक सुविधाओं से रहित लोगों के लिए नए मौके पैदा करना था।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, उन्होंने कहा कि नीति उंची आर्थिक वृद्धि दर तथा आर्थिक असमानता पर काबू पाने के दोहरे लक्ष्यों का समुचित मिश्रण होना चाहिए। बेंगलुरु में डॉ. बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अकादमिक सत्र का उद्घाटन करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हमने आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए शुरू की थी। आर्थिक विकास दर बढ़ी है लेकिन आर्थिक असमानता दूर करने की प्रक्रिया जारी है।
आपको बता दे नोटबंदी के बाद लगातार गिरती जीडीपी और चरमरा रही अर्थव्यवस्था के कारण मोदी सरकार अब विपक्ष के साथ-साथ अपने घर में भी घिरती नजर आ रही है। पिछले दिनों देश की अर्थव्यवस्था की ‘‘बदहाली’’ पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को घेरने के बाद अब बीजेपी के एक और पुराने दिग्गज अरुण शौरी ने भी मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
लगातार एक के बाद एक हमला बीजेपी पर देश को इस हाल में पहुंचाने के लिए किया जा रहा है लेकिन इन सबके बावजूद बीजेपी हालात को बेहतर दिखाने का प्रयास कर रही है। नई नौकरियां नहीं बनी है जबकि पुरानी लाखों नौकरियां लोगों की जा चुकी है। रोजगार बंद होने के कगार पर पहुंच रहे है और सरकार गाय बचाने के अभियान में व्यस्त है।
इससे पूर्व भारत में आई आर्थिक मंदी पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने जीडीपी के नवीनतम आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिसमें कहा गया था कि भारत के विकास में गिरावट “बहुत चिंताजनक” हैं। बसु ने कहा नोटबंदी के इस राजनीतिक फैसले की देश को एक भारी कीमत चुकानी होगी जिसका भुगतान देशवासियों को करना पड़ेगा।