इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना एक अलग तरह का आतंक हैः इतिहासकार एम. श्रीमाली

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देश में बढ़ती नफरत की राजनीति के चलते, संस्कृति और इतिहास में बदलाव की चाह को लेकर बीजेपी और संघ परिवार के प्रयासों के मद्दे नजर कोलकाता में भारतीय इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष के एम श्रीमाली ने भारतीय इतिहास को बदलने के की मंशाओं पर जोर देने वाले प्रयासों पर कहा कि इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना एक अलग तरीके का आतंक हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व प्रोफेसर श्रीमाली ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा कि पौराणिक कथाओं को समझने के तरीके हैं। पौराणिक कथा का हर हिस्सा इतिहास नहीं होता जिसे आप तर्क के साथ पेश नहीं कर सकते। आरएसएस-बीजेपी के पीछे एकमात्र एजेंडा का इतिहास लिखना एक हिंदू राष्ट्र बनाना था। यह इतिहास को लिखने का तरीका नहीं है।

श्रीमाली ने कहा कि RSS-BJP के पीछे एकमात्र एजेंडा का इतिहास लिखना एक हिंदू राष्ट्र बनाना था, जहां अल्पसंख्यकों को द्वितीय श्रेणी के नागरिकों के रूप में माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारत में कारण और बहस के कारण अंतरिक्ष में कमी आ रही है। हमने इस तरह की परेशान करने की प्रवृत्ति कभी नहीं देखी है इतिहास के बारे में थोड़ा ज्ञान रखने वाले लोग अपने विचार को तैयार करने और जोर देने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक अलग प्रकृति का आतंक है।

आपको बता दे कि पूर्व में बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने महात्मा गांधी को एमए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम से हटा दिया था तथा उनकी जगह वीडी सावरकर, डॉ. हेडगेवार, गुरु गोलवर्कर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय को शामिल किया गया था। इसके अलावा सरकारी तौर पर ऐसे कई प्रयास मुखर होकर सामने आए है जहां सरकार की इतिहास बदलने की मंशा जाहिर होती हो।

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