दिल्ली की जनता डैंगू और चिकिनगुनिया जैसी बीमारियों से कराह रही है और नेता है कि अपनी राजनीति में व्यस्त हैं। डैंगू से मरने वालों का सरकारी आंकड़ा 8 है लेकिन वास्तविक संख्या कुछ और ही बयां करती है।
ये दोनों ही बीमारियां मच्छर के कांटने से होती हैं। और मच्छर वहीं होते हैं जहां के स्थानीय ईलाके साफ-सुथरे नहीं होते हैं।
तो इस केस में डैंगू से मरने वाले लोगों का ज़िम्मेदार कौन, हॉस्पिटल, प्रशासन या यूं कहें खुद लोग ?
आप जानकर ये हैरान हो जाएंगे कि राजनीतिक पार्टियां सिस्टम को सही करने के बजाए इन लाशों पर भी सियासत करती हैं पर क्या उनको ये महसूस नहीं होता जिन लोगों का बच्चा या कोई अपना जाता है?
ऐसा ही मामला दिल्ली के शाहीन बाग से आया है जहां एक 8 साल के बच्चे की डैंगू से मौत हो गई है। अरमान के पिता परवेज़ ने जनता का रिर्पोटर से बात करते हुए बताया, “पिछले 10 दिनों से अरमान डैंगू बुखार से पीड़ित था। तीन दिन अलशिफा अस्पताल में एडमिट करने के बाद हालत में जब कोई सुधार नहीं आया तो हम उसे आनन फानन में बत्रा हॉस्पिटल लेकर गए लेकिन हॉस्पिटल वालों ने इलाज के नाम पर पहले 3 लाख 74 हज़ार का बिल थमा दिया और आज सुबह अरमान की मौत हो गई पैसे देने में हमें ज़रा 10 मिनट की देरी हुई तो हमारे बच्चे की डेड बॉडी को मार्चरी में शिफ्ट कर दिया”।
अरमान की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल है और वो हॉस्पिटल की लापरवाही को ही अरमान की मौत का जि़म्मेदार मान रहें हैं।
बच्चे का पिता एक प्राईवेट कंपनी में कार्यकर्त हैं।
बच्चे की मौत के बाद शाहीन बाग के इलाके के लोगों ने कहा कि शाहीन बाग में गंदगी का अम्बर लगा हुआ है जिस तरह दिल्ली सरकार और एमसीडी के झगड़ो के कारण आज ओखला बर्बाद हो रहा है, बच्चे मर रहे है, लोग ख़ौफ़ में जी रहे है।
जनता का रिपोर्टर ने जब बत्रा हॉस्पिटल के अधिकारियों से इस मुद्दे पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।