भीमा-कोरेगांव मामला: दिल्ली हाई कोर्ट से मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को बड़ी राहत, खत्म की नजरबंदी

0

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में नक्सल से जुड़े होने के आरोप में अपने घर में नजरबंद मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को सोमवार (1 अक्टूबर) को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने भीमा-कोरेगांव मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए पांच कार्यकर्ताओं में शामिल गौतम नवलखा को नजरबंदी से मुक्त करने की सोमवार को इजाजत दे दी।

(PTI File Photo)

हाईकोर्ट ने नवलखा को राहत देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते उन्हें आगे के उपायों के लिए चार हफ्तों के अंदर उपयुक्त अदालत का रूख करने की छूट दी थी, जिसका उन्होंने उपयोग किया है। कोर्ट ने निचली अदालत की ट्रांजिट रिमांड के आदेश को भी रद्द कर दिया। मामले को शीर्ष न्यायालय में ले जाए जाने से पहले इस आदेश को चुनौती दी गई थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि नवलखा को 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। आपको बता दें कि नवलखा को राजधानी दिल्ली से 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसी दिन अन्य चार कार्यकर्ताओं को देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को पांचों कार्यकर्ताओं को फौरन रिहा करने की एक याचिका खारिज करते हुए कहा था कि महज असमति वाले विचारों या राजनीतिक विचारधारा में अंतर को लेकर गिरफ्तार किए जाने का यह मामला नहीं है। इन कार्यकर्ताओं को भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरोपी और चार हफ्ते तक नजरबंद रहेंगे, जिस दौरान उन्हें उपयुक्त अदालत में कानूनी उपाय का सहारा लेने की आजादी है। उपयुक्त अदालत मामले के गुण दोष पर विचार कर सकती है। महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एलगार परिषद सम्मेलन के बाद दर्ज की गई एक प्राथमिकी के सिलसिले में 28 अगस्त को इन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।

आरोप है कि इस सम्मेलन के बाद राज्य के भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। इन पांच लोगों में तेलुगू कवि वरवर राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरूण फरेरा और वेरनन गोंजाल्विस, मजदूर संघ कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता नवलखा शामिल थे।

Previous articleFrench singer and songwriter Charles Aznavour dies at 94
Next articleGautam Navlakha released after Delhi High Court says detention in Bhima Koregaon case untenable