दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने रविवार (22 अप्रैल) को 10वें दिन अपना अनशन समाप्त कर दिया है। स्वाति ने कहा कि, ‘पहले मैं अकेली लड़ रही थी लेकिन फिर मुझे पूरे देश से समर्थन मिला। मुझे लगता है कि यह एक ऐतिहासिक जीत है और मैं इस जीत पर सबको बधाई देती हूं।’
(PTI fILE Photos)इससे पहले स्वाति ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया था कि मोदी कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दी है जिसमें 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को फांसी की सजा का प्रावधान है इसलिए वह अनशन तोड़ रही हैं। पिछले 10 दिन से राजघाट पर भूख हड़ताल कर रहीं स्वाति ने शनिवार को अपने समर्थकों से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने हमारी और देश की मांगें सुनीं। इसलिए मैंने कल दोपहर दो बजे अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया है।’’
स्वाति ने कहा कि, ‘‘मैं इस अध्यादेश को लाने के लिए प्रधानमंत्री की शुक्रगुजार हूं। मैं देश की जनता को इस जीत के लिए बधाई देती हूं।’’ हालांकि स्वाति ने इससे पहले ट्वीट किया था कि वह तब तक अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगी जब तक बेटियों की सुरक्षा के लिए कुछ ठोस नहीं होता।
उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘‘मैं अध्यादेश पारित होने तक अनशन करती रहूंगी। पुलिस के संसाधन और जवाबदेही भी बढ़ने चाहिए। वाकई दुख की बात है कि कुछ चैनल झूठी खबर फैला रहे हैं कि मैंने अनशन तोड़ दिया है। सभी समाचार चैनलों से मेरी अपील है कि फर्जी खबर नहीं चलाएं।’’
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को स्वाति से अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा था कि वह अपनी मांगें पूरी नहीं होने तक भूख हड़ताल जारी रखेंगी। स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छह मांगें उठाईं। उन्होंने अध्यादेश पारित करने, संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से पुलिस कर्मी तैनात करने और पुलिस बलों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।