टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा पर निशाना साधते हुए कहा है कि फैसले लेने की सभी शक्तियां एक ही व्यक्ति या ‘हाई-कमान’ के पास होना अनैतिक, अनुचित और भरोसे को तोड़ना है।
समूह की कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के निदेशक पद से हटाए जाने का विरोध करते हुए शेयरधारकों से मिस्त्री ने कहा कि टाटा समूह का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि टाटा ट्रस्ट के न्यासी उसका किस प्रकार संचालन करते हैं।
भाषा की खबर के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘न्यासियों को उनकी वित्तीय जिम्मदारियों का निर्वाहन करने के लिए मामलों पर अपनी बुद्धि लगाने, प्रश्न करने, परीक्षण, बहस, जांच करने एवं संतुलन करने की जरूरत है. उनमें से एक ही व्यक्ति या हाई कमान के पास निर्णय लेने की सारी शक्तियां होना अनैतिक, अनुचित और भरोसे को तोड़ने वाला है।’
मिस्त्री को वर्ष 2011 में कंपनी में चेयरमैन रतन टाटा का उत्तराधिकारी चुना गया था और उन्हें पहले डिप्टी चेयरमैन बनाया गया। टाटा संस के चेयरमैन पर दर मिस्त्री का चुनाव पांच सदस्यीय एक समिति ने किया था।
मिस्त्री को हटाने के पीछे माना जा रहा है कि घाटे में चल रही कंपनियों को छांटने और केवल लाभ देने वाले उपक्रमों पर ही ध्यान देने के उनके दृष्टिकोण से कंपनी में अप्रसन्नता थी। इनमें यूरोप में घटे में चल रहे इस्पात करोबार की बिक्री का मामला भी शामिल था। इसके अलावा कंपनी के दूरंसचार क्षेत्र के संयुक्त उद्यम टाटा डोकोमो में जापानी कंपनी से अलग होने के मामले में भी डोकोमो के साथ कंपनी का एक कानूनी विवाद चल रहा है।