सीबीआई ने हाई कोर्ट से कहा- ‘राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी मामले में दर्ज FIR संज्ञेय अपराध को दर्शाती है’

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार (1 नवंबर) को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और अन्य लोगों के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों में दर्ज प्राथमिकी संज्ञेय अपराध दिखाती है। एजेंसी ने प्राथमिकी रद्द करने की अस्थाना की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि इस स्तर पर रोविंग इंक्वायरी (विषय वस्तु से असंबद्ध) की अनुमति नहीं है।

(Photo Source: Rakesh Asthana / Facebook)

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक साथ ही सीबीआई ने अदालत से यह भी कहा कि अस्थाना के खिलाफ जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, विभिन्न दस्तावेजों और अन्य लोगों की भूमिकाओं की जांच की जा रही है। इसी संबंध में एजेंसी ने अदालत को बताया कि वह असमर्थ है क्योंकि कुछ फाइल और दस्तावेज सीवीसी (केन्द्रीय सकर्तता आयोग) की निगरानी में हैं।

एजेंसी ने अस्थाना द्वारा लगाए गए सभी प्रतिकूल आरोपों का खंडन किया है। अस्थाना, सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र कुमार और कथित बिचौलिया मनोज प्रसाद की अर्जियों पर आज दिन में न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की अदालत में सुनवाई की संभावना है।

आपको बता दें कि इस समय देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सीबीआई के दो सीनियर अधिकारी एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। सीबीआई में आतंरिक कलह के मद्देनजर मोदी सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है। वहीं, संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया है। ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी राव ने आधी रात को ही पदभार संभाल लिया।

 

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