वर्ष 2016 में जम्मू-कश्मीर में भारी अशांति के दौरान पैलेट गन के वार से अपनी आंखें खोने के बाद भी 16 वर्षीय इंशा मुश्ताक लोन ने जिंदगी की लड़ाई में हिम्मत नहीं हारी। साहस का मिसाल बनी इंशा ने अपने हौसले का परिचय देते हुए दसवीं की बोर्ड परीक्षा पास कर ली है। इंशा 2016 में पैलेट गन विरोध का चेहरा बन गई थी।
PHOTO: BILAL BAHADUR/BBCन्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक इंशा अब गायन में पारंगता हासिल कर रही है। बता दें कि इंशा के घायल चेहरे से कश्मीर में पैलेट के इस्तेमाल के विरुद्ध लोगों में विरोध के स्वर पनपे थे। अपनी नेत्रदृष्टि गंवाने के बाद संगीत का अध्ययन करने वाली इंसा मुश्ताक ने जम्मू कश्मीर में दसवीं की बोर्ड परीक्षा पास की है और उसे और पढ़ने की आस है।
भाषा से बातचीत में उसने कहा कि, ‘मैंने संगीत विषय लिया और मैं उसे पास कर गई।’ इंशा उन 43,000 विद्यार्थियों में है जिन्होंने यह परीक्षा पास की है। मंगलवार (9 जनवरी) को जम्मू-कश्मीर में 10वीं के नतीजों का ऐलान किया गया। इसमें 62 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। इंशा दक्षिण कश्मीर में शोपियां जिले के एक सुदूर गांव की रहने वाली है।
जब उससे उसकी योजना के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि, ‘अपने मां-बाप से परामर्श करने के बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए विषय का चुनाव करूंगी।’ इंशा वर्ष 2016 में ग्रीष्मकाली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों द्वारा दागे गये पैलेट लगने से नेत्रदृष्टि गंवा बैठी थी। वह अपने मकान की खिड़की से बाहर के प्रदर्शनकारियों को देख रही थी।
पेलेट से इंशा की आंखों के रेटिना और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद कई अस्पतालों में उसका इलाज हुआ, लेकिन वह देख नहीं पाई। आत्मविश्वास हासिल करने के लिए इंशा ने मनोवैज्ञानिक की भी मदद ली। एक असिस्टेंट की मदद से उसने परीक्षा दी।
उसके पिता मुश्ताक अहमद ने बताया कि गणित को छोड़कर उसने सभी पेपर पास किए। उसे गणित की परीक्षा फिर से देनी होगी, लेकिन वह अगली कक्षा में बैठ सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इंशा के प्रयासों की तारीफ की है। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल का लगातार विरोध होता आ रहा है।