आम आदमी पार्टी(AAP) ने आखिरकार गुजरात में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। शनिवार(2 सितंबर) को गुजरात प्रभारी और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने यह ऐलान किया। हालांकि, पार्टी केवल उन सीटों पर लड़ेगी जिन पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा करने वाले उम्मीदवार मिलेंगे। बता दें कि पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में 182 विधानसभा सीटों पर इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं।
फाइल फोटोराय ने कहा कि चुनाव प्रचार को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए अहमदाबाद में 17 सितंबर को रोड शो का आयोजन किया जाएगा। राय ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने लंबी चर्चा के बाद निर्णय किया कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
उन्होंने कहा कि हमने तीन मानक बनाए हैं और उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ेंगे जो हमारे मानकों को पूरा करेंगे।
उन्होंने कहा कि पार्टी उन सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां वह सक्षम उम्मीदवार पाएगी, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार या आपराधिक मामले नहीं हों और जिनका चरित्र उत्तम हो।
केजरीवाल के मंत्री ने कहा कि पार्टी जिन विधानसभा सीटों को चुनेगी उसके हर बूथ का प्रभारी होना चाहिए। साथ ही पार्टी के सदस्यों को अपने प्रचार के लिए खुद धन जुटाना होगा और इसे चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक खर्च करना होगा। राय ने कहा कि किसी एक सीट पर जुटाए गए धन को उसी विधानसभा क्षेत्र में प्रचर पर खर्च किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम केवल उन्हीं सीटों पर अपनी उुर्जा लगाएंगे जहां हम जीत सकते हैं। इसके लिए हमने राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है जो चुनाव प्रबंधन कार्यों को देखेगी। उन्होंने कहा कि संभव है कि पार्टी सभी 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।
राय ने कहा कि पार्टी ने चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक टीम बनाई है। उन्होंने कहा कि आम के सदस्य किशोर देसाई को समन्वयक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी गुजरात के लोगों को विकल्प देना चाहती है जो बीजेपी के दो दशक से ज्यादा लंबे शासन से ऊब चुके हैं और समझाते हैं कि कांग्रेस मजबूत विपक्षी पार्टी नहीं है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम आदमी को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कई पहल के माध्यम से सहयोग करने का मॉडल बनाया है। राय ने कहा कि उनकी पार्टी इस मॉडल को गुजरात के मतदाताओं के समक्ष रखना चाहती है।
बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनावों में बीजेपी से करारी हार मिलने के बाद AAP के गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ने पर संकट के बादल दिखने लगे थे। सीएम केजरीवाल की पार्टी हाल में हुए पंजाब विधानसभा चुनावों में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी थी, लेकिन परिणाम से पार्टी निराश हो गई, क्योंकि इसके नेताओं को राज्य में सत्ता में आने की उम्मीद थी। बहरहाल लगता है कि हाल में बवाना विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद पार्टी ने इस पर फिर विचार किया है।