राष्ट्रगान के मुद्दे पर जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राय की पीठ ने सुनवाई करते हुए साफ किया कि किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले राष्ट्रगान का चलाया जाना जरूरी होगा चाहे तुम्हें इसके लिए 40 बार ही खड़ा क्यों ना होना पड़े। ये जवाब फिल्म फेस्टिवल में 40 फिल्मों की स्क्रीनिंग के सवाल पर दिया गया था।
केरल में अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल होना है। उसके आयोजक ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करके 30 नवंबर के आदेश से छूट का अनुरोध किया था। उसने वजह बताते हुए कहा था कि महोत्सव में 1500 विदेशी मेहमानों को असुविधा होगी।
बेंच ने कहा, ’केवल इसलिए हमें अपना आदेश वापस लेना चाहिए क्योंकि कुछ विदेशियों को थोड़ी सी मुश्किल का सामना करना होगा? विदेशियों के लिए हमें अपना आदेश वापस क्यों लेना चाहिए? यदि विभिन्न शोज में 40 मूवी चलायी जाएंगी, तो आपको 40 बार खड़ा होना होगा।’ विदेशियों को खुश करने के लिए हम अपने फैसले में बदलाव क्यों करें? बेंच ने आगे कहा, ‘क्या देश या राष्ट्रगान का सम्मान करने में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए?
एक और बात को साफ करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब हमने कहा कि दरवाजे बंद किए जाएंगे तो हमारा तात्पर्य यह नहीं था कि दरवाजों में चिटकनी लगा दी जाए जैसा कि दिल्ली नगर निगम बनाम उपहार ट्रैजडी विक्टिम्स एसोसिएशन के मामले में उल्लिखित है परंतु राष्ट्रगान के दौरान यह सिर्फ लोगों के आने-जाने को नियंत्रित करने के लिए है। अदालत इस मामले में अब 14 फरवरी, 2017 को आगे विचार करेगी।