राईट विंग का आइटम गर्ल तारेक फतह, अमित शाह का कचरा और रविश कुमार के खिलाफ भाजपा के सोशल मीडिया प्रमुख की नफरत

1

कसाब? वो आपके राजनीतिक विरोधी हैं, देश विरोधी नहीं! कितनी नफरत अमित शाह? कोई हद है इसकी? कि आपने कांग्रेस, सपा औप बसपा को एक आतंकवादी बता दिया? आपको क्या ऐसे ही प्रतीक मिलते हैं? या फिर ये “भी” एक जुमला है? जिसके लिए आप काफी मशहूर होते जा रहे हैं.

कसाब एक आतंकवादी था, वो शख्स जिसने कई बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा. यूपी मे जीत कर आप क्या कर लोगे? इस बेशर्मी से ये नफरत क्यों परोसी जा रही है? अफसोस ये कि ये नफरत शीर्षस्थ बीजेपी नेताओं से आ रही है. मोदीजी ने श्मशान कब्रिस्तान वाला बयान बहुत सोच समझ कर दिया था. वो जानते थे कि मीडिया और उनके विरोधी बयान का कौनसा हिस्सा उठाएंगे. वो बखूबी जानते थे. वो जानते थे कि यूपी चुनावों मे ध्रुविकरण का तड़का लग जाए, तो सोने पर सुहागा और यकीनन इसके प्रसार मे विपक्ष और मीडिया दोनो से मदद मिली है. आप ऐसे संवाद को स्थापित करके क्या साबित करना चाहते हो. किस यूपी की बात कर रहे हैं आप?

अमित शाह इतने उत्तेजित क्यों दिखाई देते हैं? एक पत्रकार के सवाल के जवाब मे ये तक बोल दिया कि ये कचरा कहां से लाए हो? कचरा? और आपका कसाब वाला बयान गंगा जल है क्या? मुझे चिंता इस बात की है कि अलग अलग ऐजेंसियों , लोगों के ज़रिए इस तरह की नफरत और दोहराव का प्रसार किया जा रहा है.

गौर कीजिए, तारिक फतह पर. राईट विंग के आईटम गर्ल. मै इनकी मौजूदगी और औचित्य को समझ नही पा रहा हूं. हिन्दुस्तानी मुसलमानों को तैमूर की औलाद कहना. बार बार मुसलमानो के बारे मे, भारत के उदारवादी बुद्दिजीवियों के बारे मे वाहियात बातें करना, आखिर किस ऐजेंडा का हिस्सा है? हाल मे कांग्रेस नेता शहज़ाद पूनावाला से उनका टकराव देखा. टीवी शो के दौरान या ब्रेक मे अपशब्द, हिंसा की धमकी, ये सब करने की आज़ादी किसे दी इस शक्स को? वो शक्स जो यहां वीज़ा पर है, कैसे इतनी नफरत फैला सकता है और किसकी शह पर?

नफरत का ये काकटेल अब लगभग हर मोर्चे पर घोला जा रहा है. जो आपसे इत्तेफाक न रखे, उसे धमकाओ और ये तब तक करतो रहो जब तक वो खामोश न हो जाए.

पत्रकार रवीश कुमार पर उनके भाई के बहाने हमला इसी कड़ी मे है. मामले की गहराईयों पर नहीं जाना चाहूंगा, ओम थानवी इस पर लिख चुके हैं, आप पढ़ सकते हैं. मगर रवीश पर हमला क्यों भाई? और ये योजनावद्ध तरीके से किया जा रहा है. चाटूकार पत्रकारों की तो समझ आती है, मगर जब बीजेपी के सोशियल मीडिया विंग के प्रमुख अमित मालवीय इसकी अगुवाई करते हैं तब समझ आता है कि मामला कितना संगीन है.

गौर कीजिए इस बेशर्मी पर, मालवीय के इस ट्वीट पर. Heady mix? यानि घातक मेल? बीजेपी के नेता जब गुजरात मे सेक्स रैकट मे पकड़े जाते हैं या आईएसआई के ऐजेंट मुख्यमत्री शिवराज चौहान के साथ फोटो खिंचवाते हैं, तब आपका तर्क कहां जाता है और क्या उसे भी यहां लागू किया जाए?

जो भाई पर आरोप है, उसका खमियाज़ा भाई भुगते? इतनी कायर है तुम्हारी सियासत? तुम एक ऐसी पार्टी के सोशियल मीडिया विंग के प्रमुख हो, जिसके समर्थक सबसे अभद्र , सबसे बदतमीज़ माने जाते हैं. सुबूत की ज़रूरत तुम्हे भी नहीं. अक्सर सोचता हूं, अपने परिवार की महिलाओं के सामने क्या आचरण रहता होगा इन महानुभवों का. क्या इस गंदगी की नुमाइंदगी या प्रसार मंज़ूर होगा उन्हे?

यानि के माध्यम तो स्पष्ट हैं. सबसे बड़े नेताओं से जो कारवां शुरू होता है, वो तारिक फतह, अमित मालवीय से होकर इनको लाखों समर्थकों तक जा पहुंचता है. ऐसे मे देश के सभ्य समाज को तय करना होगा कि इस नफरत मे रहकर हम किस सुख का अहसास कर रहे हैं. दूसरो को गाली देकर, प्रौपगैंडा करके खुश तो तुम भी नही रह पाओगे? इस हिड़स, नफरत मे जीना क्यों मंज़ूर है तुम्हे?

ऐसे मे जानना ज़रूरी है कि आखिर सियासत के कसाब कौन हैं? इस देश मे कौन कसाब को फिर ज़िंदा कर रहा है? किसका आदर्श है कसाब? कौन कसाब से सबसे ज़्यादा प्रेरित दिख रहा है? अगर अब भी जवाब चाहिए, तो गर्दन दफ्न रखो अपनी उदासीनता की रेत मे. याद रखना खतरा फिर भी नहीं टलेगा.