नोटबंदी का असर जानने की खातिर फरवरी-मार्च 2016 में हरियाणा और मध्य प्रदेश सरकार ने नोटबंदी के असर का आकलन करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैन्स एंड पॉलिसी से संपर्क किया था।
एनआईपीएफपी को राज्य पर पड़ने वाले नोटबंदी प्रभावों का आकलन करने को कहा गया था। ये आदेश पीएम मोदी की नोटबंदी से पहले ही दिया गया था।
फरवरी-मार्च 2016 में हरियाणा और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैन्स एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) से संपर्क किया था। एनआईपीएफपी को नोटबंदी के किसी राज्य पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने को कहा गया था।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक रिसर्च की घोषणा आधिकारिक तौर पर जुलाई में की गई थी लेकिन इससे पहले की रीसर्च का काम पूरा कर रिपोर्ट सौंपी जाती उससे पहले ही नोटबंदी की घोषणा हो चुकी थी। एनआईपीएफपी नई दिल्ली स्थित एक थिंक-टैंक ऑटोनोमस सोसायटी है।
जनसत्ता की खबर के अनुसार, सरकार के रीसर्च का यह कदम उठाने की वजह अर्थक्रांति प्रतिष्ठान एनजीओ की रिपोर्ट थी जिसके सुझावों का आकलन किया जाना था।
इसी एनजीओ ने करेंसी के बड़े नोटों को निकालने का भी सुझाव दिया था। मध्य प्रदेश सरकार के कर विभाग को लगा कि इस रिपोर्ट का आकलन किया जाना जरूरी था क्योंकि उसमें टैक्स सिस्टम से जुड़ी भी कुछ जरूरी बातें थी।
ऐसे में ये प्रश्न उठना स्वभाविक है कि क्या राज्य सरकार नोटबंदी के फैसले से पहले ही जानती थी इसी कारण से वह इसके परिणामों पर सर्वे कराना चाहती थी।