सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई द्वारा कथित तौर पर विजय माल्या के किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज समेत समेत कुल 7,000 करोड़ रुपये का ऋण माफ करने पर उपजे विवाद के बीच नासिक के एक सफाई कर्मचारी ने एसबीआई को पत्र लिखकर उसका भी 1.5 लाख रु का कर्ज माफ करने की मांग की है।
महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर नगर परिषद में सफाई कर्मचारी भाउराव सोनावने ने बताया कि उन्होंने एसबीआई से उनका कर्ज ‘‘उसी तर्ज पर माफ करने की मांग की है जिस तरह बैंक ने माल्या का कर्ज माफ किया है।’’ सोनावने ने बताया, ‘‘मैंने बैंक को पत्र लिखा कि माल्या का कर्ज माफ करने के उसके ‘अच्छे फैसले’ के लिए बधाई दी है।
मैंने एसबीआई से मेरा रिण भी माफ करने का अनुरोध किया है.’’ उन्होंने बताया कि यह कर्ज उन्होंने बेटे की बीमारी के इलाज के लिए लिया था और अभी तक बैंक प्रबंधक ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया है।
बहरहाल, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार के नोटबंदी अभियान पर सदन में चर्चा के दौरान कहा था कि बट्टे खाते में डालने का मतलब कर्ज माफी नहीं है। कर्ज तो अभी भी बना हुआ है जिसे वसूलने की कोशिश जारी रहेगी।
भाषा की खबर के अनुसार, सोनावने ने बताया, ‘‘मैंने बैंक को पत्र लिखा और माल्या का कर्ज माफ करने के उसके ‘अच्छे फैसले’ के लिए बधाई दी है। मैंने एसबीआई से मेरा ऋण भी माफ करने का अनुरोध किया है।’’ उन्होंने बताया कि यह कर्ज उन्होंने बेटे की बीमारी के इलाज के लिए लिया था और अभी तक बैंक प्रबंधक ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया है।
वित्त मंत्री ने बताया था कि राइट ऑफ का ये मतलब नहीं है कि लोन माफ कर दिया गया है। राइट ऑफ करने का मतलब सिर्फ इतना होता है कि बैंक ने अकाउंटिंग बुक में लोन को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए मान लिया गया है।
राइट ऑफ करने को लोन की माफी ना समझा जाए। बता दें कि विपक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए थे कि वो जनता को तो नोटबंदी से परेशान कर रही है जबकि कारोबारियों का लोन माफ कर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के चलते लोग लाइनों में लगे हैं, वहीं ललित मोदी, विजय माल्या जैसे लोन डिफॉल्टर आजाद घूम रहे हैं।