भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त लंदन ओलिंपिक 2012 के कांस्य से रजत में बदले पदक को मानवीय कारणों से लेने के उत्सुक नहीं हैं, क्योंकि शुरुआत में दूसरे स्थान पर रहे पहलवान के उनकी मौत के बाद डोप परीक्षण में पॉजीटिव पाए जाने का पता चला।
भाषा की खबर के अनुसार, योगेश्वर ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘बेसिक कुदुखोव शानदार पहलवान थे. उनकी मृत्यु के बाद डोप टेस्ट में विफल हो जाना दुखद है. मैं खिलाड़ी के रूप में उनका सम्मान करता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर हो सके तो यह पदक उन्हीं के पास रहने दिया जाए. उनके परिवार के लिए भी सम्मान पूर्ण होगा. मेरे लिए मानवीय संवेदना सर्वोपरि है।’’
Besik Kudukhov शानदार पहलवान थे। उनका मृत्यु के पश्चात dope test में fail हो जाना दुखद हैं। मैं खिलाड़ी के रूप में उनका सम्मान करता हूँ।
— Yogeshwar Dutt (@DuttYogi) August 31, 2016
अगर हो सके तो ये मेडल उन्ही के पास रहने दिया जाए। उनके परिवार के लिए भी सम्मानपूर्ण होगा। मेरे लिए मानवीय संवेदना सर्वोपरि है।
— Yogeshwar Dutt (@DuttYogi) August 31, 2016
चार बार के विश्व चैम्पियन और दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता कुदुखोव की दक्षिण रूस में 2013 में कार दुर्घटना में मौत हो गई थी. उनके 2012 में लिए नमूने का रियो खेलों से पूर्व विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी ने दोबारा परीक्षण किया गया जिसमें वह विफल रहे.
वह अब सुशील कुमार के साथ लंदन खेलों में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पहलवान हैं.
योगेश्वर लंदन खेलों के प्री क्वार्टर फाइनल में कुदुखोव से हार गए थे लेकिन रूस के पहलवान के फाइनल में जगह बनाने पर उन्हें रेपेचेज राउंड में हिस्सा लेने का मौका मिला और उन्होंेने कांस्य पदक जीता.
वैश्विक संस्था (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) से लिखित में भारतीय कुश्ती महासंघ :डब्ल्यूएफआई: को स्वीकृति मिलने के बाद योगेश्वर को रजत पदक सौंपा जाना है।