शिवसेना के मुखपत्र सामना ने कहा, उत्तराखंड में केन्द्र सरकार का वस्त्रहरण हुआ है

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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद चारों तरफ केन्द्र की आलोचना का दौर शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के लिये एक बड़ा झटका है जब उनके किसी फैसले को चुनौति देकर पलट दिया गया हो। शिवसेना के मुखपत्र में आज के सम्पादकीय में बेहद तल्ख अंदाज में टिप्पणी की है।
सामना के अनुसार उत्तराखंड मामले में राष्ट्रपति से गलती हुई, ऐसा न्यायालय का अब कहना अर्थात मोदी सरकार से गलती हुई, ऐसा ही कहने के सामान है। राष्ट्रपति हमारे देश का संवैधानिक प्रमुख है, पर आखिरकार रबड़ की मुहर ठहाराए जाते है। मंत्रिमण्डल या सरकारी सिफारिशों व सलाहों के अनुसार वह मुहर लगाते रहते है और सत्ताधारियों को स्वयं का अस्तित्व जताने वाले के बजाय इसी तरह रबड़ की मुहर चाहिए।
हमारा कहना शत-प्रतिशत सत्य है, उत्तराखंड राष्ट्रपति मामले में वह साबित हो चुका है। आखिरकार मोदी सरकार ने वह अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिये मारने की कोशिश की थी। लेकिन अदालत ने ये कोशिश नाकाम कर दी। इसके कारण केन्द्र सरकार तो का वस्त्रहरण हुआ ही है, लेकिन राष्ट्रपति महोदय की प्रतिमा और प्रतिष्ठा भी धूसरित हुई है। इस बात को दिल्ली ध्यान में कब लेने वाले है?
आगे सामना लिखता है कि कब कौन गलती करेगा, इसका भरोसा नहीं, लेकिन दूसरे करते है वह गलती और हम करते है वह कूटनीति या राष्ट्रीय कत्र्तव्य मानने वाले सयान आज सब जगह दिखाई दे रहे है। हिन्दूस्तान में सवालों की ज्वाला भड़क रही है। कश्मीर से लेकर सर्वत्र भड़का हुआ है। 33 प्रतिशत जनता सूखे की खाई में झुलस रही है लेकिन यहां किसी की क्या गलती यह मानने को कोई तैयार नहीं है।
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