“किसान को कोसना एक फैशन बन गया है, पराली जलाना केवल प्रदूषण का एकमात्र कारण नहीं”: दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, दिल्ली सरकार से पूछे कई तीखे सवाल

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देश की राजधानी दिल्ली और NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई हुई। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि सरकार को दो दिनों के लिए लॉकडाउन पर विचार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए किसानों द्वारा पराली जलाने को पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

फाइल फोटो

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि प्रदूषण में अन्य योगदानकर्ता हैं जैसे वाहनों का उत्सर्जन, पटाखों, औद्योगिक उत्सर्जन, धूल आदि, जिन्हें आकस्मिक आधार पर संबोधित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने के अलावा दिल्ली में इंडस्ट्रीज, पटाखें और डस्ट प्रदूषण के कारण हैं। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वायु प्रदूषण की वजह से बने आपातकालीन हालात से निपटने के लिए क्या फैसले लिए गए हैं, इसके बारे में सोमवार को जानकारी दें। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय की।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, दिल्ली के वायु प्रदूषण के लिए “किसानों को कोसना” इन दिनों एक फैशन बन गया है चाहे वह दिल्ली सरकार हो या कोई और। पीठ ने यह भी आलोचनात्मक टिप्पणी की कि दिल्ली पुलिस ने दिवाली समारोह के दौरान दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि, आपको इस मुद्दे को राजनीति और सरकार से परे देखना होगा। कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे दो-तीन दिन में हम बेहतर महसूस करें। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि स्मॉग टावर और उत्सर्जन नियंत्रण परियोजनाओं को स्थापित करने के उसके फैसले का क्या हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा, आपने राष्ट्रीय राजधानी में सभी स्कूल खोल दिए हैं और अब बच्चे प्रदूषण के संपर्क में हैं। यह केंद्र का नहीं बल्कि आपका अधिकार क्षेत्र है। उस मोर्चे पर क्या हो रहा है? SG ने कोर्ट से कहा कि पराली समस्या का हिस्सा हो सकती है लेकिन एकमात्र कारण नहीं है।

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