किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को लगाई फटकार, पूछा- कृषि कानूनों पर आप रोक लगाएंगे या हम लगाएं?

0

कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहें किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नए कृषि कानूनों को लेकर जिस तरह से केन्द्र और किसानों के बीच बातचीत चल रही है, उससे वह ‘‘बेहद निराश’’ है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मोदी सरकार से पूछा है कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इसपर रोक लगा दे। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसानों की चिंताओं को कमिटी के सामने रखे जाने की जरूरत है।

किसान आंदोलन
(फोटो: टिकरी बॉर्डर, जनता का रिपोर्टर / सुरेश कुमार)

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, ‘क्या चल रहा है? राज्य आपके कानूनों के खिलाफ बगावत कर रहे हैं।’ उसने कहा, ‘हम बातचीत की प्रक्रिया से बेहद निराश हैं।’ पीठ ने कहा, ‘हम आपकी बातचीत को भटकाने वाली कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन हम इसकी प्रक्रिया से बेहद निराश हैं।’ पीठ में न्यायमूर्ति एस. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. सुब्रमण्यम भी शामिल थे।

शीर्ष अदालत प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में गतिरोध बरकरार रहने के बीच नए कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं और दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई कर रही थी। उसने कहा ‘यह एक बहुत ही नाजुक स्थिति है।’ पीठ ने कहा, ‘हमारे समक्ष एक भी ऐसी याचिका दायर नहीं की गई, जिसमें कहा गया हो कि ये तीन कृषि कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं।’

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को लेकर समिति की आवश्यकता को दोहराया और कहा कि अगर समिति ने सुझाव दिया तो, वह इसके क्रियान्वयन पर रोक लगा देगा। उसने केन्द्र से कहा, ‘हम अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ नहीं हैं; आप बताएं कि सरकार कृषि कानूनों पर रोक लगाएगी या हम लगाएं?’ कोर्ट ने पूछा आप किस तरह हल निकाल रहे हैं?

हालांकि, अटॉर्नी जनरल केके. वेणुगोपाल ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी कानून पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक वह मौलिक अधिकारों या संवैधानिक योजनाओं का उल्लंघन ना करे। वहीं, न्यायालय ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों से कहा, ‘आपको भरोसा हो या नहीं, हम भारत की शीर्ष अदालत हैं, हम अपना काम करेंगे।’

गौरतलब है कि, केन्द्र और किसान संगठनों के बीच सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया था जबकि किसान नेताओं ने कहा था कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और उनकी ‘‘घर वापसी’’ सिर्फ ‘‘कानून वापसी’’ के बाद होगी। केन्द्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है। (इंपुट: भाषा के साथ)

Previous articleUP DElEd BTC 3rd Semester Result 2020 Declared: बीटीसी तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा के नतीजे btcexam.in पर घोषित, ऐसे करें चेक
Next articleप्रीति जिंटा के परिवार के सदस्यों ने कोरोना वायरस को दी मात, अभिनेत्री ने बयां किया दर्द