किसानों के विरोध प्रदर्शन पर सियासत भी गरमाई, राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी चेतावनी, BJP ने कसा तंज

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च की पृष्ठभूमि में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को किसानों की मांगें माननी होंगी और ‘काले कानून’ वापस लेने होंगे। राहुल के बयान पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास ने पलटवार किया है।

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गौरतलब है कि, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और अब यूपी के किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। जगह-जगह उन्हें रोकने के लिए गुरुवार से ही हरियाणा और दिल्ली में बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किए गए, बैरिकेडिंग की गई। कुछ जगहों पर टकराव भी हुआ लेकिन शुक्रवार दोपहर को आखिरकार किसानों को दिल्ली आने की इजाजत देनी ही पड़ी। दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं से बातचीत में तय हुआ कि किसानों को दिल्ली आने दिया जाएगा बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत होगी।

इस बीट, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने #IamWithFarmers (मैं किसानों के साथ हूं) हैशटैग के साथ ट्वीट कर सीधे-सीधे पीएम मोदी को चेतावनी दी- जब-जब अहंकार सच्चाई से टकराता है, पराजित होता है। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री को याद रखना चाहिए था कि जब-जब अहंकार सच्चाई से टकराता है, पराजित होता है। सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे किसानों को दुनिया की कोई सरकार नहीं रोक सकती।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मोदी सरकार को किसानों की मांगें माननी ही होंगी और काले क़ानून वापस लेने होंगे। ये तो बस शुरुआत है!’’

दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी तंज कस रहे हैं कि हम कांग्रेस नहीं हैं जो किसानों के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा दें। आइए बात कीजिए, कोई भ्रम है तो दूर कीजिए। सरकार के दरवाजे बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “नरेंद्र मोदी की सरकार किसानों के हित के लिए समर्पित है, समर्पित थी, समर्पित रहेगी। अगर किसानों को कुछ भी भ्रम है तो सरकार के दरवाजें बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं, हमने कांग्रेस की तरह नो एंट्री बोर्ड नहीं लगाया है।”

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील कर रहे हैं और 3 दिसंबर को किसान संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया है। उन्होंने कहा, “नए कानून बनाना समय की आवश्यकता थी, आने वाले कल में ये नए कृषि कानून, किसानों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। नए कृषि कानूनों के प्रति भ्रम को दूर करने के लिए मैं सभी किसान भाइयों एवं बहनों को चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूँ।”

कृषि मंत्री ने कहा, ‘मोदी सरकार ने एमएसपी को डेढ़ गुना किया। कृषि के क्षेत्र में एक लाख करोड़ से इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम चल रहा है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। नए कानून आने वाले दिनों में किसानों की जिंदगी में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं।’ किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने आगे कहा, ‘सचिव स्तर पर भी किसान संगठनों से वार्ता हुई, मैंने खुद भी चर्चा की। लेकिन चर्चा पूरी नहीं हो पाई थी। किसानों को फिर से 3 दिसंबर को चर्चा के लिए बुलाया है। सरकार बातचीत के लिए तैयार है, चर्चा के माध्यम से ही रास्ते निकलते हैं। किसान अपना आंदोलन वापस करें और चर्चा के लिए आए।’

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के किसान संसद के मानसून सत्र में पारित कृषि कानूनों के विरोध में आज दिल्ली मार्च कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि हाल में पारित तीनों कृषि कानून किसान विरोधी है। कांग्रेस इन क़ानूनों पहले से ही विरोध कर रही है। (इंपुट: भाषा के साथ)

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