संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के प्रमुख शशि थरूर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद एवं समिति के सदस्य निशिकांत दुबे सोमवार को एक बार फिर आमने-सामने आ गए, जब कांग्रेस सांसद ने कथित ‘जहरीले’ समाचार चैनलों को नामी कंपनियों द्वारा विज्ञापन दिए जाने पर सवाल खड़ा किया। थरूर की टिप्पणी पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने स्थायी समिति के मंच का दुरुपयोग किया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल की तिरुअनंतपुरम सीट से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और कहा, ‘‘क्या प्रतिष्ठित कंपनियों को घृणा पैदा करने वाले चैनल पर विज्ञापन देना चाहिए?’’ उन्होंने विज्ञापन देने वाली कई कंपनियों के नाम भी लिए और सवाल किया, ‘‘क्या ये भी पारले की तरह नैतिक साहस जुटा पाएंगी?’’
थरूर ने परोक्ष रूप से उस हालिया खबर का हवाला दिया, जिसमें बिस्कुट के नामी ब्रांड पारले के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि ‘जहरीली सामग्री प्रसारित करने वाले’ कुछ चैनलों को यह कंपनी विज्ञापन नहीं देगी।
These are no better since they pay for news on TimesNow: Cadbury, Toyota, Hyundai, Nerolac, Birla Group, Amul, Skoda, Mercedes, Ceat, Samsung, Bluestar, HDFC, Sony, TCS. They "fund the toxicity, the hatred and bigotry, which our news channels spew 24×7": https://t.co/SInGsc2rck
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 18, 2020
भाजपा सांसद और समिति के सदस्य दुबे ने थरूर की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह स्थायी समिति के प्रमुख के पद का दुरुपयोग कर रहे हैं तथा मीडिया का ध्यान खींचने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के परामर्श का उल्लंघन कर रहे हैं।
बता दें कि, इससे पहले जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा के निलंबन और फेसबुक प्रकरण को लेकर भी इन दोनों सांसदों ने एक-दूसरे पर निशाना साधा था। (इंपुट: भाषा के साथ)