बिहार में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस (चमकी बुखार) से मरने वाले बच्चों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक इस बिमारी की चपेट में आने से राज्य में अब तक करीब 70 बच्चों की मौत हो चुकी है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. शैलेष प्रसाद सिंह ने शनिवार को कहा कि चमकी बुखार से अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 69 हो गया है। जिसमें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 58 और केजरीवाल अस्पताल में 11 बच्चों की मौत हुई है।
Dr. Shailesh Prasad Singh, Civil Surgeon, Muzaffarpur: Death toll rises to 69 due Acute Encephalitis Syndrome (AES). 58 died at Sri Krishna Medical College and Hospital and 11 at Kejriwal Hospital. #Bihar pic.twitter.com/TCHAavsRJI
— ANI (@ANI) June 15, 2019
गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस का कहर जारी है। बिहार में इसे चमकी बुखार भी कहा जाता है। बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार घिरती हुई नजर आ रहीं है। चमकी बुखार के कहर के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। एईएस के प्रकोप से मरने वाले ज्यादातर बच्चे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हैं।
लगातार हो रही मौतों के कारणों की जांच के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम मुजफ्फरपुर में है। इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसमी फल लीची खाने के चलते बच्चे हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो रहे है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया था कि चमकी के कारण हो रही मौतों का कारण लीची भी हो सकती है। कहा जा रहा है कि मुजफ्फरपुर के आस-पास उगाई जाने वाली लीची में कुछ जहरीले तत्व हैं।
वहीं, इस खबर को अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज के बाद बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने अब परिवारों को सलाह दी है कि वे इस बीमारी को देखते हुए अपने बच्चों को खाली पेट में फल न खिलाएं। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर परिवारों को आधी पकी या अधपकी लीची नहीं खाने की भी चेतावनी दी है। बता दें कि, मुजफ्फरपुर अपनी बेहतरीन किस्म की लीची के लिए प्रसिद्ध है, जो मई और जून में वहां पर मिलती है।
बता दें कि, इससे पहले एक टीवी न्यूज चैनल से बातचीत में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि, “इन मौतों के पीछे कई कारण है। लेकिन एक कारण यह भी है कि बच्चे भूखे पेट लीची खा लेते हैं इस वजह से उन्हें इन्सेफ्लाइटिस हो रहा है। लीची में जो बीज होता है वह शुगर को कम करता है। हालांकि इस पर पूरी रिसर्च की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार इंसेफिलाइटिस को लेकर पूरी तरह से अलर्ट है। मुजफ्फरपुर में मरीजों के लिए बेड, एंबुलेंस और आईसीयू की व्यवस्था की गई है। साथ ही जिस भी चीज की जरूरत होगी सरकार उसे मुहैया कराने के लिए तैयार है। 2014 में भी इंसेफिलाइटिस को कम करने के लिए सरकार ने काम किया था, जिसके बाद इसमे कमी देखने को मिली थी।