प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को ‘भयानक जनसंहार’ बताने पर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (11 मई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात में 2002 के दंगों की याद दिलाई। इससे पहले मोदी ने 1984 में सिख विरोधी दंगों को कथित तौर पर ‘भयावह जनसंहार’ करार दिया था।
ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मोदी जीवन की रक्षा करने के अपने संवैधानिक कर्तव्य में विफल रहे थे। ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘‘श्रीमान प्रधानमंत्री वैसे ही 2002 के दंगे भी थे जो मुख्यमंत्री के तौर पर आपके कार्यकाल के दौरान हुए थे और आप मानव जीवन की रक्षा करने के अपने संवैधानिक शपथ में विफल रहे थे।’’
Sir @PMOIndia so where the 2002 pogrom which happened under your tenure as CM & you FAILED in your constitutional oath to protect human beings,accused won elections in 84&2002
PM Modi slams Pitroda's remark, calls 1984 riots a 'horrendous genocide' https://t.co/Fm8XzoJJxh— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 10, 2019
ओवैसी हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं जहां से वह फिलहाल सांसद हैं। उन्होंने कहा कि मामलों के आरोपियों ने 1984 और 2002 में चुनाव जीते। एआईएमआईएम प्रमुख 1984 के सिख विरोधी दंगों पर कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के “हुआ तो हुआ, टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर मोदी के हमले की ओर इशारा कर रहे थे। पित्रोदा ने बीजेपी पर “सच्चाई तोड़ मरोड़कर पेश करने” का आरोप लगाया था और कहा था कि इस चुनाव में अतीत की चीजें प्रासंगिक नहीं हैं।
पित्रोदा ने मांगी माफी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने 1984 के सिख दंगों के संबंध में अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए शुक्रवार को माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उनकी हिंदी अच्छी नहीं है, और इसलिए उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। इंडियन ओवरसीस कांग्रेस के अध्यक्ष पित्रोदा ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगे को यह कहकर खारिज कर दिया था, “हुआ तो हुआ।”
पित्रोदा ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, “मेरे बयान को पूरी तरह अलग रंग दिया गया और उसे संदर्भ से बाहर लिया गया, क्योंकि मेरी हिंदी अच्छी नहीं है। मेरा मतलब था ‘जो हुआ वो बुरा हुआ’। लेकिन मैं बुरा का अनुवाद अपने दिमाग में नहीं कर सका।” उन्होंने कहा, ‘मुझे दुख है कि मेरा बयान गलत ढंग से पेश किया गया। मैं माफी मांगता हूं।’
राहुल गांधी ने बताया ‘त्रासदी’
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं ओवरसीज कांग्रेस के प्रभारी सैम पित्रोदा की टिप्पणी को ‘पूरी तरह से पार्टी लाइन से बाहर’ बताते हुए उनसे माफी मांगने को कहा। गांधी ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से पित्रोदा से बात करेंगे और उन्हें बताएंगे कि वह ‘इस प्रकार की बकवास’ की सराहना न करें।
कांग्रेस अध्यक्ष ने एक समाचार वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा, “ मुझे लगता है कि यह (टिप्पणी) पूरी तरह से पार्टी लाइन से बाहर है और मुझे लगता है कि उन्हें (सैम पित्रोदा) को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। मुझे लगता है कि 1984 का दंगा एक त्रासदी थी। दंगे ने लोगों को गहरा जख्म दिया। और मुझे लगता है कि श्री पित्रोदा को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।”