महिला के साथ कथित यौन शोषण मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के बाहर महिला वकील और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में कुछ महिला वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाहर महिला कार्यकर्ताओं, वकीलों और कई संगठनों के प्रदर्शनकारी पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के बाहर धारा 144 लगा दी गई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह प्रदर्शन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोप से निपटने के लिए अपनाए गए तरीके के खिलाफ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कथित पीड़िता के बयान को गंभीरता से नहीं लिया गया। सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले कुछ पत्रकारों के मुतबिक, बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है। किसी भी प्रकार की अनचाही स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास धारा 144 लगा दी गई है।
Delhi: Women lawyers and activists today held a protest outside the Supreme Court against the procedure adopted to deal with sexual harassment case against CJI Ranjan Gogoi. Section 144 has been imposed outside SC following the protest. pic.twitter.com/oefGGSCRCJ
— ANI (@ANI) May 7, 2019
बता दें कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न के आरोपों से सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की आंतरिक समिति ने क्लीन चिट देते हुए सोमवार (6 मई) को कहा गया कि उसे उनके खिलाफ कोई ‘‘ठोस आधार’’ नहीं मिला। शीर्ष अदालत की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने प्रधान न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये थे। सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के कार्यालय की एक नोटिस में कहा गया है कि न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट ‘‘सार्वजनिक नहीं की जाएगी।’’ समिति में दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी भी शामिल थीं।
महिला ने जताई निराशा
वहीं, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने न्यायालय की आंतरिक समिति द्वारा सोमवार (7 मई) को उन्हें क्लीन चिट दिए जाने पर कहा कि वह “बेहद निराश और हताश” हैं। उन्होंने कहा कि भारत की एक महिला नागरिक के तौर पर उसके साथ “घोर अन्याय” हुआ है और उसका “सबसे बड़ा डर” सच हो गया और देश की सर्वोच्च अदालत से न्याय की उसकी उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गई हैं।
महिला ने प्रेस के लिए एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने वकील से परामर्श कर आगे के कदम पर फैसला उठाएंगी। उन्होंने कहा, “आज, मैं कमजोर और निरीह लोगों को न्याय देने की हमारी व्यवस्था की क्षमता पर विश्वास खोने के कगार पर हूं…।” उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया से पता चला कि प्रधान न्यायाधीश अपना बयान दर्ज कराने के लिए समिति के समक्ष पेश हुए, लेकिन इस बात की जानकारी नहीं है कि आरोपों से अवगत अन्य लोगों को समिति के समक्ष बुलाया गया या नहीं।