सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (7 मार्च) को अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल द्वारा वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर की पत्नी कहे जाने पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा, ‘‘मेरी अपनी निजी हैसियत है।’’ यह वाकया न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की खंडपीठ के सामने तब हुआ जब ग्रोवर ने अदालत से कहा कि वह जयसिंह की ओर से पेश हो रहे हैं। जयसिंह ने वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ अटार्नी जनरल द्वारा दायर अदालत की अवमानना याचिका में दखल देने की मांग करते हुए अर्जी लगाई है।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने ग्रोवर से पूछा कि इस मामले में वह किसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस पर ग्रोवर ने कहा, ‘‘श्रीमती जयसिंह का’’। इस पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने सवाल किया, ‘‘इंदिरा जयसिंह का नहीं।’’ तब ग्रोवर ने स्पष्ट किया कि वह उनकी ओर से पेश हो रहे हैं। इसी बीच अदालत में मौजूद वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘उन्हें (ग्रोवर को) कहना चाहिए कि पत्नी के लिए (उपस्थित हो रहे हैं)।’’
इस पर जयसिंह ने एतराज किया और कहा, ‘‘श्रीमान् अटार्नी जनरल, आप अपनी टिप्पणी वापस लीजिए। मेरी अपनी निजी हैसियत है।’’ हालांकि कुछ मिनट बाद जयसिंह ने कहा, ‘‘श्रीमान अटार्नी, मुझे दुख है कि मैं अपना आपा खो बैठी। हम वयक्तिगत वकील के रूप में पहचाने जाते हैं। हमारी पहचान किसी के पति या पत्नी के रूप में नहीं होती है। हम अपना व्यक्तित्व बनाए हुए हैं। इसलिए हमने नाम नहीं बदलना तय किया।’’
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— indira jaising (@IJaising) March 7, 2019
जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्होंने इस मामले में दखल देने के लिए अर्जी लगाई है, क्योंकि अदालत एक ऐसे मुद्दे से निपट रही है कि क्या वकील या वादी जनमत को प्रभावित करने के लिए विचाराधीन मामलों में अदालत की कार्यवाही की आलोचना कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी बराबर लिखती हूं। मैं चिंतित हूं और मैं कानून की सीमा जानना चाहती हूं। मेरा प्रतिनिधित्व कौन करे, यह मेरी पसंद है। कृपया ग्रोवर को मेरा पक्ष रखने दीजिए।’’ इस पर पीठ ने कहा, ‘‘चिंता मत कीजिए, जब हम इस मुद्दे की सुनवाई करेंगे तब हम सभी की बात सुनेंगे।’’