पिछले लोकसभा चुनावों में ईवीएम हैकिंग की जानकारी होने के कारण बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या का साइबर विशेषज्ञ द्वारा दावा किए जाने के बाद बीजेपी नेता के भतीजे और राकांपा नेता धनंजय मुंडे ने सोमवार को मामले की जांच रॉ या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की मांग की।
महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता मुंडे ने अमेरिका में रह रहे भारतीय स्वयंभू साइबर विशेषज्ञ के दावे पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि गोपीनाथ मुंडे से प्रेम करने वालों ने उनकी मृत्यु पर हमेशा सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि यह दुर्घटना थी या कोई साजिश, इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
राकांपा नेता ने ट्वीट किया है, एक साइबर विशेषज्ञ ने सनसनीखेज दावा किया है कि गोपीनाथ राव मुंडे साहेब की हत्या की गई। इन दावों की तुरंत रॉ/उच्चतम न्यायालय से जांच कराने की जरूरत है क्योंकि यह एक जननेता से जुड़े हैं।
A cyber expert has made a sensational claim that former Union Minister Late Gopinathrao Munde saheb was murdered. This claim needs immediate attention and investigation from RAW/Supreme Court, as it is directly linked to the death of mass leader. #EVMHacking 1/2
— Dhananjay Munde (@dhananjay_munde) January 21, 2019
बता दें कि 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिलने के कुछ ही सप्ताह के भीतर दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु हो गई थी।
बता दें कि सोमवार को ही एक अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक किया जा सकता है। लंदन में चल रही हैकथॉन में इस साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया है कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की 2014 में हत्या की गई थी। एक्सपर्ट सईद सूजा का कहना है कि मुंडे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने के बारे में जानकारी रखते थे। भारत में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम को डिजाइन करने वाले एक्सपर्ट ने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी धांधली हुई थी।
एक बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि वह ‘इस दुर्भावना से प्रेरित बहस का हिस्सा बनने को लेकर सावधान है और वह भारतीय चुनावों में इस्तेमाल होने वाले ईसीआई के ईवीएम की पुख्ता प्रकृति के अनुभवजनित तथ्यों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ा है।’ आयोग ने एक बयान में कहा, ‘इस बात पर अलग से विचार किया जा रहा है कि मामले में क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और क्या कार्रवाई की जानी चाहिये।’
आयोग ने एक बार फिर से दोहराया कि उसके द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले ईवीएम का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) बेहद कड़ी निगरानी और सुरक्षा दशाओं में करते हैं।
(इनपुट- भाषा)