दिल्ली का प्रशासनिक बॉस कौन होगा? सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इस मामले में आज यानी बुधवार (4 जुलाई) को अहम फैसला सुनाया। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के कामों की लक्ष्मणरेखा भी खींच दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कई टिप्पणियां की हैं।
दिल्ली सरकार और एलजी विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल हर मामले को राष्ट्रपति को रेफर नहीं कर सकते हैं। साफ है कि अब उपराज्यपाल मामलों को राष्ट्रपति को रेफर करने का हवाला देते हुए लटका नहीं सकते हैं, उन्हें कैबिनेट की सलाह या फिर खुद से फैसला लेना ही पड़ेगा।
जानिए लाइव अपडेट :
. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लैंड, पुलिस और लॉ सरकार के अधीन नहीं आएंगे। इन तीन विषयों को छोड़ कर चाहे वह बाबुओं का ट्रांसफर का मसला हो या अन्य शिकायतें वे सारी शिकायतें अब दिल्ली सरकार के अधीन आ जाएंगी: AAP नेता राघव चड्ढा
Supreme Court ne saaf kardiya hai ki land, police aur law &order sarkaar ke adheen nahi aayenge, in teen vishayon ko chorr kar chahe woh baabuon ke transfer ka masla ya aur anye shaktiyan hon woh saari shaktiyan ab Delhi government ke aadheen aa jayengi: Raghav Chadha, AAP pic.twitter.com/0PwJk1lWQg
— ANI (@ANI) July 4, 2018
. मुझे लगता है कि जो सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह साफ है। अगर दिल्ली सरकार और एलजी साथ काम नहीं कर सकते तो दिल्ली को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने 15 साल तक दिल्ली पर शासन किया पर कोई विवाद नहीं हुआ: शीला दीक्षित
I think what SC has said is very clear. As per Article 239 (AA) of the Constitution, Delhi is not a state,it is a UT.If Delhi Govt&LG don't work together then Delhi will face problems. Congress ruled Delhi for 15 years, no conflict took place then: Sheila Dikshit, Former Delhi CM pic.twitter.com/UhRLmovOKN
— ANI (@ANI) July 4, 2018
. दिल्ली का प्रशासनिक बॉस चुनी हुई सरकार है न कि LG
. LG हर मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। संवैधानिक संघीय संरचना को संतुलित करने के लिए उसे केवल असाधारण मौक़ों पर ही हस्तक्षेप करना चाहिए
. लोकप्रिय जनादेश को कमज़ोर होने नहीं दिया जा सकता
. अनुच्छेद 23 9 AA के तहत, चुनी हुई सरकार को राज्य से सम्बंधित कानून बनाने की कुछ शक्तियां हैं।
. एलजी को सभी मामलों की जानकारी दी जाए, उसके बाद अपने अधिकारों को देखते हुए ले सकते हैं फैसला- केंद्र सरकार के वकील
. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा- ‘यह दिल्ली के लोगों और लोकतंत्र की एक बड़ी जीत है।’
A big victory for the people of Delhi…a big victory for democracy…
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 4, 2018
. हर मुद्दे पर एलजी की सहमति जरूरी नहीं है लेकिन उन्हें हर मुद्दे की सूचना देनी चाहिए। अगर एलजी को कोई मतभेद हो तो वह मामले को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।
. चीफ जस्टिस और दो अन्य जजों ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर फैसला एलजी को बताना होगा। हालांकि, हर मामले में एलजी की सहमति जरूरी नहीं।
. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और अन्य दो जजों ने कहा, एलजी को दिल्ली सरकार के साथ सौहार्दपूर्वक काम करना चाहिए।
. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
. केजरीवाल सरकार vs उपराज्यपाल मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा फैसला पढ़ रहे हैं।
बता दें कि, उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताने वाले, दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही थी। दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में करीब एक दर्जन याचिकाएं दाखिल हुई थीं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है इसलिए उपराज्यपाल ही सरकार के संवैधानिक मुखिया हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केजरीवाल सरकार ने तर्क दिया था कि पंचायत को भी अधिकार होते हैं फिर दिल्ली की सरकार को लोगों ने चुना है। आखिर उसके फैसले को उपराज्यपाल कैसे पलट सकते हैं।
वहीं, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि दिल्ली में शासन के हालत वैसे नहीं हैं, जैसा दिल्ली सरकार कह रही है, बल्कि ये केजरीवाल सरकार का प्रोपेगेंडा है। पांच जजों की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं।