प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की सीईओ और एमडी चंदा कोचर पर कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद या हितों के टकराव का सनसनीखेज आरोप लगा है। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक ने उस वीडियोकॉन कंपनी को 3,250 करोड़ रुपये का लोन दिया, जिसके मालिक वेणुगोपाल धूत के साथ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के कारोबारी रिश्ते हैं। आरोप है कि वीडियोकॉन को 3,250 करोड़ का लोन दिलाने में कथित तौर पर चंदा कोचर ने मदद की थी।
File Photo: PTIPM मोदी और अरुण जेटली को 2016 में ही दी गई थी जानकारी
इस बीच इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर गंभीर आरोप लगा है। पीएम और वित्त मंत्री पर आरोप है कि आईसीआईसीआई की सीईओ चंदा कोचर से जुड़े 3,250 करोड़ रुपये के इस कथित भ्रष्टाचार मामले की जानकारी दो वर्ष पहले ही दे दी गई थी, लेकिन इन्होंने इस पर कोई कार्रवाई ना कर मामले को नजरअंदाज कर दिया। जी हां, एक शख्स ने चिट्ठी लिखकर इस मामले की जानकारी पीएम मोदी और अरुण जेटली को वर्ष 2016 में दी थी।
ICICI बैंक के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने 22 अक्टूबर 2016 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और वित्त मंत्री जेटली को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि ICICI बैंक ने कर्ज में दबे वीडियोकॉन कंपनी के खराब रिकॉर्ड के बावजूद एक बार फिर उसे कर्ज दिया है। ABP न्यूज से बातचीत में अरविंद गुप्ता ने कहा कि 2016 में पत्र लिखने के बावजूद अभी तक किसी भी मंत्रालय से कोई जवाब नहीं आया है। यहां क्लिक कर आप पूरा लेटर पढ़ सकते हैं। अरविंद ने अपने पत्र में पूरी विस्तृत जानकारी देते हुए इस मामले को पीएम मोदी के संज्ञान में लाया था। अगर उस वक्त इस चिट्ठी पर संज्ञान ले लिया गया होता तो इस वक्त शायद इतना बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आता।
गुप्ता ने बताया कि 2016 को भेजे गए पत्र का जब कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने 2017 में भी एक बार फिर चिट्ठी लिखकर पीएम मोदी और जेटली का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन फिर भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यहां तक कि मंत्रालयों से उन्हें चिट्ठी मिलने की भी पुष्टि नहीं की गई। अरविंद का कहना है कि मंत्रालयों ने सोचा होगा कि यह मामला समाप्त हो गया है, लेकिन मेरे द्वारा उठाया गया यह मामला आखिरकार अब मीडिया में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2008 में वीडियोकॉन समूह के मालिक वेणुगोपाल धूत ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों के साथ मिलकर कंपनी खड़ी की। फिर कंपनी के लिए 64 करोड़ रुपये का लोन पास हुआ। लोन देने वाली कंपनी वेणुगोपाल धूत की थी। बाद में मात्र 9 लाख रुपये में कंपनी दीपक कोचर के हवाले कर दी गई। यह कंपनी दीपक कोचर के ट्रस्ट को दी गई।
अखबार के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी के हस्तांतरण से छह महीने पहले ही आईसीआईसीआई बैंक ने 3,250 करोड़ का लोन वीडियोकॉन ग्रुप को दिया। ऐसे में लोन मिलने के बाद वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक की ओर से बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को कंपनी का मालिकाना हक देने पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात है कि वर्ष 2017 में जब वीडियोकॉन पर 2,810 करोड़ रुपये का कर्ज था, तब इसे एनपीए घोषित कर दिया गया। इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ICICI बैंक ने दी सफाई
आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर पर लगाए गए आरोपों के बाद बैंक ने एक प्रेस नोट जारी कर सफाई दी है।बैंक की तरफ से जारी बयान में आईसीआईसीआई बैंक के निदेशक मंडल ने कहा है कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज या किसी अन्य कंपनी को कर्ज देने में पक्षपात या कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट कोई मामला नहीं है।
अफवाहों को “दुर्भावनापूर्ण और निराधार” बताते हुए आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि बोर्ड ने लोन की स्वीकृति की आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा की है और उसे मजबूत पाया है। बोर्ड को अपने एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा और विश्वास है। अपने बयान में बैंक ने यह भी कहा है कि ठीक इसी तरह कि अफवाह पहली बार 2016 में उठी थी, तब भी उचित जवाब दिया गया था।
बैंक का कहना है कि सभी तथ्यों को देखने के बाद बोर्ड इस नतीजे पर पहुंचा है कि भाई-भतीजावाद और हितों के टकराव सहित भ्रष्टाचार की जो अफवाहें चल रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। इस तरह की अफवाह आईसीआईसीआई की साख को खराब करने के लिए फैलाई जा रही है।’
#ICICIBank Board expresses and reposes full faith and confidence in its MD & CEO, Ms. Chanda Kochhar. We urge you not to be misled by any rumours which are being spread to malign the Bank and its top management. Read: https://t.co/iCK2LPxg5v pic.twitter.com/iGVFQEXCv7
— ICICI Bank (@ICICIBank) March 28, 2018