इस साल कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत समुदाय की अलग धर्म की मांग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार (23 मार्च) को लिंगायत समुदाय के लिए अल्पसंख्यक दर्जा घोषित कर दिया। सरकार ने नागमोहन दास कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए लिंगायत समुदाय के लोगों को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को मंजूरी दी थी।
File Photo: News18सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जा देने की केंद्र से सिफारिश की है। अब इस पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार को करना है। कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बीच कर्नाटक की सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मामले में सियासी टकराव बढ़ता जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले की निंदा की और इसे हिंदुओं को बांटने वाला फैसला करार दिया है। वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए एक लेटर जारी कर दावा किया है कि बीजेपी के मौजूदा मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा खुद राज्य में लिंगायत समाज के बड़े नेता हैं और उन्होंने लिंगायत समाज को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग पर हस्ताक्षर किए थे।
बता दें कि लिंगायत समाज मुख्य रूप से दक्षिण भारत में है। लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। कर्नाटक की जनसंख्या में लिंगायत समुदाय की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है। इस समुदाय को बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है। यहां तक कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं।
Karnataka government declares minority status to #Lingayats community pic.twitter.com/zUSKp7fJAv
— ANI (@ANI) March 23, 2018
अब कर्नाटक में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने वीरशैव लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देकर बड़ा दांव खेल दिया है। कांग्रेस के इस दांव से बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। क्योंकि अब बीजेपी के इसी वोटबैंक में कांग्रेस सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। उनका यह फैसला बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। लिहाजा इस मामले पर सियासी वार-पलटवार शुरू हो गया है।
राज्य सरकार ने लिंगायतों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर विचार के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागामोहन दास की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने लिंगायत समुदाय के लिए अलग धर्म के साथ अल्पसंख्यक दर्जे की सिफारिश की थी, जिसे कैबिनेट की तरफ से अब मंजूरी मिल गई है। अब यह सिफारिश केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पास भेजा जाएगा, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस मामले पर अंतिम फैसला करना होगा।