उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जिले में अभी भी हालात तनावपूर्ण हैं। इलाके से अभी भी छिटपुट हिंसक घटनाएं होने की सूचना है। शहर में बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है। त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) और पीएसी के जवान स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अफवाहें फैलाने वालों और उपद्रवियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस बीच नेताओं के बयान भी माहौल को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता विनय कटियार ने कहा कि कासगंज की घटना दु:खद है। लगता है कि ‘पाकिस्तान परस्त लोग आ गये हैं जो राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, वे पाकिस्तान के झंडे को स्वीकार कर रहे हैं। पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाने वालों के खिलाफ सख्त होनी चाहिए। सरकार और सख्त कदम उठाये।’ कटियार ने कहा कि तिरंगा रैली के दौरान भड़की हिंसा में मारे गये चंदन की पाकिस्तान समर्थकों ने हत्या की है।
अगर मृतक मोहम्मद-इस्माईल होता तो मीडिया में अलग बहस होती
वहीं, भाषा के मुताबिक इस हिंसा के संबंध में संवाददाताओं के सवालों पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर मृतक चंदन गुप्ता की जगह कोई मोहम्मद इस्माईल होता तो मीडिया में अलग बहस होती। हमें इस मनोवृत्ति को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कासगंज हिंसा सुनियोजित लगती है। योगी आदित्यनाथ सरकार इस तरह की घटनाओं में लिप्त किसी को नहीं बख्शेगी।
उन्होंने कहा कि एक नौकरशाह ने भी ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे को लेकर कुछ टिप्पणी की है। ‘मैं कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा क्यों ना लगाया जाए जबकि पाकिस्तान हमारे सैनिकों को मारता है और वह सीमा पार से आतंकवाद फैलाने में शामिल है।’
कासगंज प्रकरण के परिप्रेक्ष्य में फेसबुक टिप्पणी को लेकर विवादों के घेरे में आये बरेली के जिलाधिकारी कैप्टन राघवेन्द्र विक्रम सिंह का कहना है कि ऐसी घटनाओं से समस्याएं पैदा होती हैं और प्रदेश में विकासकार्य अवरूद्ध होते हैं। हालांकि सिंह ने अपनी फेसबुक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उसे अपने वाल से हटा लिया है।
भाषा के मुताबिक उन्होंने कहा कि, ‘… बिना प्रशासनिक अनुमति के अगर कोई ऐसा काम होता है तो कितनी बड़ी समस्याएं पैदा हो जाती हैं … इतना आक्रामक होना, पुलिस की अनुमति नहीं लेना, इससे परेशानियां पैदा होती हैं। इन्हीं तकलीफों का बयान मैंने फेसबुक पर किया था।’ सिंह ने कहा कि ऐसी घटनाओं से प्रदेश में विकासकार्य रूकता है।
उन्होंने फेसबुक पर अपनी पहली पोस्ट में लिखा था, ‘अजब रिवाज बन गया है। मुस्लिम मुहल्लों में जबरदस्ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ। क्यों भाई वे पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली में खैलम में हुआ था। फिर पथराव हुआ। मुकदमे लिखे गए।’ सिंह ने यह फेसबुक टिप्पणी 28 जनवरी को की थी। वहीं, खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि इस प्रकरण का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
योगी के मंत्री ने बताया ‘छोटी घटना’
इस बीच उत्तर प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता और योगी सरकार में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कासगंज के सांप्रदायिक हिंसा को ‘छोटी घटना’ करार देते हुए विवादित बयान दिया है। सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसी घटना को इतना तूल नहीं दिया जाना चाहिए। यह एक ‘छोटी घटना’ हुई है, जिसमें दो लोगों के साथ हादसा हुआ है। सरकार गंभीर है और कार्रवाई कर रही है।
कृषि मंत्री ने कासगंज घटना पर कहा, ‘…गलत है और किसी मामले को अनावश्यक तूल देना भी सही नहीं है। एक छोटी घटना हुई जिसमें दो लोगों के साथ हादसा हुआ है। सरकार उसके बारे में गंभीर है और कार्रवाई कर रही है। कश्मीर से तुलना कर प्रदेश का माहौल खराब न किया जाए।’
Ghalat hai,aur kisi maamle ko anavashyak tul dena bhi sahi nahi hai. Ek chhoti ghatna hui jisme do logon ke saath haadsa hua hai.Sarkar uske baare me gambhir hai, karyavahi kar rahi hai. Kashmir se tulna karke pradesh ka mahaul kharab na kiya jaye:UP Minister SP Shahi on #Kasganj pic.twitter.com/cq9hTm7Cz6
— ANI UP (@ANINewsUP) January 29, 2018
उपद्रवियों ने दुकान में लगाई आग
इस बीच ताजा घटनाक्रम में एक दुकानदार के स्टोर को कल रात आग लगा दी गयी। दुकानदार ने कहा कि वह इलाके का अकेला मुस्लिम दुकानदार है। ‘मैं यहां 20 साल से रह रहा हूं लेकिन हमें कभी कोई दिक्कत नहीं आयी।’ राज्यपाल राम नाईक ने घटना पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि यह राज्य की छवि पर धब्बा है। योगी सरकार ने जिले के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह को कल हटा दिया।
इस बीच सोशल मीडिया पर जिस राहुल उपाध्याय की मौत की खबर वायरल हो रही थी, उसका खंडन करते हुए खुद राहुल ने कहा कि वह हिंसा के समय कासगंज में नहीं था। उपाध्याय को अपने मित्र से इस अफवाह की सूचना मिली।उधर पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों पर रासुका लगाया जाएगा। हिंसा में कथित भूमिका के लिए 100 से अधिक लोगों को अभी तक जेल भेजा जा चुका है।
पत्रकार अभिसार ने 'आज तक' के तथाकथित पत्रकारों रोहित सरदाना और श्वेता सिंह द्वारा फैलाये जा रहे झूठों का किया पर्दाफ़ाश
Posted by जनता का रिपोर्टर on Sunday, January 28, 2018
जिला प्रशासन ने एक शांति समिति बनायी है। वह तनावग्रस्त इलाकों में घूम रही है और जनता से आग्रह कर रही है कि वह अफवाहों पर ध्यान ना दे। एक अधिकारी ने बताया कि कुछ जगहों पर छापेमारी में अवैध हथियार बरामद हुए हैं। बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हो गई थी, जिसमें चंदन गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।