केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार(1 अक्टूबर) को संकेत दिए कि राजस्व बढ़ने के बाद माल एवं सेवा कर (जीएसटी) स्लैब में कटौती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कर की दरों में भी सुधार की गुंजाइश है और छोटे करदाताओं को राहत दी जा सकती है। बता दें कि अभी वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के स्लैब्स में बांटा गया है।फरीदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी के तहत राजस्व का पर्याप्त स्तर पाने के बाद बड़े सुधारों के बारे में सोचा जा सकता है और अनुपालन का बोझ कम किया जा सकता है। जेटली ने कहा कि हमारे पास इसमें दिन के हिसाब से सुधार करने की गुंजाइश है। हमारे पास सुधार की गुंजाइश है और अनुपालन का बोझ कम किया जा सकता है। खासकर छोटे करदाताओं के मामले में।
हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जेटली ने पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का नाम लिए बगैर कहा कि कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए करों का भुगतान किया जाना जरूरी है। जीएसटी जैसे टैक्स सुधार को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि जो लोग देश के विकास की मांग करते हैं, उन्हें इसमें खुद योगदान करना चाहिए और ईमानदारी से कर भुगतान करना चाहिए।
जेटली ने कहा कि समय बदलने के साथ अब लोगों की मानसिकता बदली है और वे महसूस करने लगे हैं कि कर भुगतान होना चाहिए। लिहाजा अब सभी तरह के करों को समाहित करने की जरूरत है। अगर कर ढांचे में एक बार बदलाव स्थापित हो जाता है तो बेहतरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जेटली ने कहा कि जब देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है तो लोगों पर अप्रत्यक्ष कर का बोझ अधिक हो गया है। प्रत्यक्ष कर समाज के अमीर लोग देते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर सभी के लिए बोझ है। इसी कारण हम अपनी वित्तीय नीति में यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि बुनियादी जरूरत की वस्तुओं पर सबसे कम कर भार हो।
उन्होंने कहा कि ऐसे में राजकोषीय नीति के तहत हमेशा यह प्रयास किया जाता है कि ऐसे जिंस जिनका उपभोग आम लोगों द्वारा किया जाता है, तो उन पर अन्य की तुलना में टैक्स की दर कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का हमेशा से यह प्रयास है कि अधिक उपभोग वाले जिंसों पर कर दरों को नीचे लाया जाए।