आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने अपने कमांडर जाकिर मूसा के हुर्रियत नेताओं के खिलाफ बयान से खुद को अलग कर लिया, जिससे आतंकी संगठन में मतभेद का संकेत मिलता है। हिजबुल मुजाहिदीन के प्रवक्ता सलीम हाशमी ने शनिवार(13 मई) को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद से एक बयान में कहा कि मूसा के बयान से संगठन का कोई लेना-देना नहीं है और न ही यह स्वीकार्य है।मूसा के ऑडियो बयान को ‘निजी मत’ करार देते हुए हाशमी ने आगाह किया कि भ्रम पैदा करने वाला कोई भी बयान या कदम ‘संघर्ष के लिए ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकता है। बता दें कि मूसा के बयान से संबंधित पांच मिनट का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑडियो में मूसा को धमकी देते सुना जा सकता है।
मूसा कह रहा है कि मैं सभी ढोंगी हुर्रियत नेताओं को चेतावनी देता हूं कि वे हमारे इस्लाम के ‘संघर्ष’ में बिल्कुल हस्तक्षेप न करें। अगर वो ऐसा करेंगे तो हम उनका सिर काटकर उसे लाल चौक पर लटका देंगे। इसमें वह अलगाववादी नेताओं को धमकी देता है कि वे सीरिया और इराक में आईएसआईएस की स्थापित व्यवस्था के अनुरूप जम्मू-कश्मीर में खलीफा स्थापित करने के उनके उद्देश्य में दखल न दें।
हाशमी ने कहा कि संगठन मूसा के बयान पर विचार कर रहा है और जारी संघर्ष के हित में ‘कोई कदम उठाने या बलिदान देने से नहीं हिचकिचाएगा।’ राज्य के पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि पुलिस ने ऑडियो की आवाज की जांच कराई और पाया कि ऑडियो में आवाज मूसा की ही है।
अगले स्लाइड में पढ़ें, कौन है जाकिर मूसा?