अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को झटका देते हुए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर मंगलवार(9 मई) को रोक लगा दी है। बता दें कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को कथित जासूसी के आरोप में 10 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट का यह फैसला पाकिस्तानी सरकार और सेना के लिए झटका है, जो भारतीय अधिकारियों या जाधव के परिवार को उससे मिलने की इजाजत नहीं दे रहा है।इस संबंध में इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को एक पत्र भी भेजा है। हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने भारत की ओर से यह कहे जाने के बाद कि नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद व्यवसाय कर रहे जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था, उन्हें मिली फांसी की सजा की तामील पर स्थगन लगा दिया है।
इस बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा, मैंने कुलभूषण जाधव की मां से बात की है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बारे में बताया है।
I have spoken to the mother of #KulbhushanJadhav and told her about the order of President, ICJ under Art 74 Paragraph 4 of Rules of Court.
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) May 9, 2017
Mr.Harish Salve, Senior Advocate is representing India before International Court of Justice in the #KulbhushanJadhav case.
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) May 9, 2017
सुषमा ने एक अन्य ट्वीट कर कहा, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत की ओर से इस केस का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे कर रहे हैं। बता दें कि जाधव की मां अवंती जाधव ने पिछले महीने ही पाक स्थित एक हाई कोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी
दरअसल, पाक का दावा है कि जाधव को पिछले साल 3 मार्च को निर्विवाद बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया था।पाकिस्तान के फिल्ड जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा पिछले महीने जाधव को मौत की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद भारत ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी और ‘सोच समझ कर की जाने वाली हत्या’ को अंजाम दिए जाने की स्थिति में द्विपक्षीय संबंधों में खटास और परिणाम भुगतने की चेतावनी पाकिस्तान को दी थी।
पाक ने जाधव पर आरोप लगाया था कि वह इंटेल एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग या रॉ के लिए एक जासूस के तौर पर काम कर रहे थे। पाकिस्तान ने दावा किया कि वह “भारतीय नौसेना में एक सेवारत अधिकारी” थे।
हालांकि, भारत भी यह स्वीकार करता है कि जाधव ने नौसेना में सेवा दी है, लेकिन इसे इनकार करता है कि अब उसका सरकार से कोई लेना-देना है। भारत ने इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी जाधव का ईरान से अपहरण कर लिया गया था, जहां वह एक व्यवसाय चला रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 10 मार्च को भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को रॉ का एजेंट बताकर मौत की सजा सुना दी। उन्हें जासूसी करने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया गया है। आनन-फानन में पाक सेनाध्यक्ष ने जाधव की सजा-ए-मौत पर मुहर भी लगा दी।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई सेंटर- द इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत सभी आरोपों में दोषी पाया। आईएसपीआर ने कहा कि जाधव भारतीय नौसेना के कमांडर हैं और उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
जाधव पर पाक ने आरोप लगाया है कि वह बलूचिस्तान और कराची जैसी जगहों पर अशांति फैलाकर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने और उसे अस्थिर करने की रणनीति के तहत काम कर रहे थे। पाक ने सैन्य अदालतों का गठन देश में आतंकी घटनाओं में लिप्त आतंकियों के खिलाफ जल्द सुनवाई के लिए किया था।
लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से भारतीय नागरिक जाधव के खिलाफ सैन्य कोर्ट में गुपचुप तरीके से केस चलाया गया। उन्हें बिना कोई कानूनी सहायता उपलब्ध कराए फांसी की सजा सुना दी गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को बचाव में वकील मुहैया कराया गया था।
इस मामले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि जाधव भारत का बेटा है, उसे बचाने के लिए कुछ भी करेंगे। सुषमा ने पाक को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देती हूं कि अगर वे कुलभूषण को फांसी देते हैं तो भारत सरकार के साथ रिश्ते बिगड़ेंगे, वे इसके नतीजे भुगतने को तैयार रहें।