CM आदित्यनाथ के मंत्रालय पहुंची उन्हीं के विवादित बयानों के मामलों की फाइल, पुलिस ने मांगी केस चलाने की मंजूरी

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उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रालय(गृह विभाग) में एक ऐसे मामले की फाइल पहुंची हैं जिसका संबंध सीधे तौर पर उन्हीं से है। जी हां, दरअसल यूपी पुलिस ने एक केस से जुड़े आरोपियो पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी मांगी है, जिसमें स्वयं योगी आदित्यनाथ भी आरोपी हैं।

जनसत्ता के मुताबिक, इस मामले में सीएम आदित्यनाथ के अलावा गोरखपुर के विधायक राधामोहन दास अग्रवाल और बीजेपी राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला भी आरोपी हैं। पुलिस ने आईपीसी की धारा 153-A (धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने) के तहत चार्जशीट दायर करने की आधिकारिक इजाजत की मांग की है। यह मामला जनवरी 2007 में गोरखपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।

गौरतलब है कि आदित्‍यनाथ ने बुधवार(22 मार्च) को अपने मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया। जिसमें गृह मंत्रालय और राजस्व जैसे कई अहम विभाग सीएम आदित्यनाथ ने अपने पास ही रखे हैं। यही वजह है कि पुलिस ने इस मामले की फाइल गृह मंत्रालय भेजी है जिस पर खुद सीएम को ही फैसला लेना है कि अपने आप पर मुकदमा चलाने की इजाजत दी जाए या नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जनवरी 2007 को को कुछ लड़कों द्वारा एक महिला से छेड़छाड़ के बाद शहर में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी। पुलिस ने छेड़छाड़ करने वाले आरोपी मनचलों का कुछ दूर तक पीछा भी किया, लेकिन आरोपी मोहर्रम के जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में घुलमिल गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में फायरिंग भी हुई, जिसमें कुछ लोग घायल हुए और फिर दो गुटों के बीच सांप्रदायिक हिंसा फैल गई।

इस मामले को लेकर परवेज परवाज नाम के एक पूर्व पत्रकार ने रिपोर्ट दर्ज करवाने की कोशिश की, मगर पुलिस ने केस दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट की तरफ से  मामले में दखल देने के बाद 26 सितंबर 2008 को एफआईआर दर्ज हुई।

एफआईआर के मुताबिक, सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसमें उन्होंने हिंदू युवा की मृत्यु के बदले की बातें कही थीं। वहीं, इस मामले को लेकर परवेज का दावा है कि उसके पास सीएम आदित्यनाथ के कथित रूप से दिए गए भड़काऊ भाषण की वीडियो फुटेज है जो उन्होंने कर्फ्यू लगे होने के दौरान दिए थे।

वहीं परवेज का यह भी आरोप है कि आदित्यनाथ के साथ उस समय गोरखपुर एमएलए राधामोहन दास अग्रवाल, बीजेपी राज्य सभा एमपी शिव प्रताप शुक्ला, मेयर अन्जु चौधरी और पूर्व बीजेपी एमएलसी वाय डी सिंह भी मौजूद थे। बता दें कि सीएम आदित्यनाथ भले ही यूपी की कमान संभालने के बाद अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन राजनीति में आदित्यनाथ की पहचान एक फायरब्रांड हिंदू नेता की रही है, उनके कई बयानों ने विवादों का रूप लिया है।

 

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