मणिपुर में BJP के मत प्रतिशत में करीब 20 गुना की रिकॉर्ड वृद्धि, TMC को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

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मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के मत प्रतिशत में करीब 20 गुना की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के मत प्रतिशत में भारी कमी आई है।

भाजपा को इस बार 36.6 प्रतिशत मत मिले हैं, जबकि 2012 के चुनावों में उसे सिर्फ 2.12 प्रतिशत मत वोट मिले थे। सत्तारूढ़ कांग्रेस के मत प्रतिशत में पिछले चुनावों के मुकाबले करीब साढ़े सात प्रतिशत की कमी आई है। पार्टी को 2012 में 42.42 प्रतिशत मत मिले थे, लेकिन इस बार उसे 35.1 प्रतिशत वोट मिले हैं।

उल्लेखनीय तथ्य यह है कि चुनावों में सत्तारूढ़ दल के मुकाबले करीब डेढ़ प्रतिशत ज्यादा मत पाने के बावजूद भाजपा को कांग्रेस से सात सीटें कम मिली हैं। वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में 7.23 प्रतिशत मत पाने वाली एनसीपी को इस बार महज एक फीसदी वोट मिले हैं।

वहीं अप्रत्याशित रूप से रामविलास पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी ने राज्य में एक सीट पर जीत दर्ज की है। पार्टी को करीब ढ़ाई प्रतिशत मत हासिल किए, जबकि पिछले चुनाव में पार्टी को महज 0.55 फीसदी मत मिले थे। प्रदेश में चुनाव लड़ रहे 12 दलों में से भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य किसी का मत-प्रतिशत दहाई के आंकड़े को नहीं पा सका है।

मणिपुर में मतदाताओं ने कई दलों के मुकाबले नोटा का बटन दबाया है। राज्य में नोटा को 0.5 प्रतिशत वोट मिले हैं। 9,062 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। नोटा की बात करें तो थांगजू विधानसभा सीट से ज्यादा 398 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।

इसके अलावा जिरिबाम सीट पर 389, बांगखेड़ सीट पर 341 और खुराई सीट पर 322 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। राज्य की कुल 60 सीटों में से 14 सीटों पर 200 से ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। राज्य की 60 सीटों से राजनीतिक भाग्य आजमा रहे कई उम्मीदवारों को 100 वोट भी नहीं मिले। प्रदेश में 23 उम्मीदवार ऐसे रहे जिन्हें 100 से कम मत मिले।

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