नई दिल्ली। गत वर्ष 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी की घोषणा के असर से खासकर टिकाऊ उपभोक्ता सामान उद्योग में बड़ी गिरावट के बीच दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) एक साल पहले इसी माह की तुलना में 0.4 प्रतिशत कम रहा। औद्योगिक क्षेत्र का यह चार महीने का सबसे खराब प्रदर्शन है।
इस टिकाऊ उपभोक्ता सामान बनाने वाले उद्योगों के उत्पादन में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की गिरावट आई। कुल विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन भी गिरा है। दिसंबर 2015 में औद्योगिक उत्पादन 0.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।इन आंकड़ों से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद पुराने नोटों का चलन बंद होने की वजह से नकदी संकट से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ है।
नवंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही थी। इसमें नोटबंदी का प्रभाव शामिल नहीं था। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से शुक्रवार(10 फरवरी) को जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में दो प्रतिशत की गिरावट आई। एक साल पहले समान महीने में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 1.9 प्रतिशत घटा था।
इससे पहले अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 0.7 प्रतिशत घटा था। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर की अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 0.3 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रही है। इससे पिछले वित्त वर्ष के पहले नौ माह में औद्योगिक उत्पादन 3.2 प्रतिशत बढ़ा था।
समीक्षाधीन महीने में टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 10.3 प्रतिशत घट गया। इस खंड में टीवी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन आदि का उत्पादन आता है। एक साल पहले समान महीने में टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 16.6 प्रतिशत बढ़ा था।
एफएमसीजी सहित उपभोक्ता गैर टिकाऊ क्षेत्र का उत्पादन दिसंबर में पांच प्रतिशत घटा। दिसंबर, 2015 में यह 2.7 प्रतिशत घटा था। कुल मिलाकर उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन दिसंबर में 6.8 प्रतिशत घटा है, जबकि एक साल पहले समान महीने में इसमें 3.2 प्रतिशत की बढ़त रही थी।