वीडियो: क्या है कासगंज का सच? तिरंगा यात्रा नहीं भगवा झंडे के साथ पहुंचकर हिंदुत्व उपद्रवियों ने मुसलमानों को गणतंत्र दिवस मनाने से रोकने की कोशिश की थी

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उत्तर प्रदेश के कासगंज में जारी हिंसा के बीच एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें बाइक पर सवार तिरंगा यात्रा की बात झूठी साबित होती नज़र आ रही है। इस वीडियो में साफ़ तौर पर भगवा झंडा पकडे युवक को देखा जा सकता है। साथ ही साथ मुसलामानों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी सुने जा सकते हैं।

कासगंज के मुस्लिमों का कहना है कि वो वहां पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के लिए जमा हुए थे, जब बाइक पर सवार हिंदुत्व संगठनों से जुड़े कुछ लोग बाइक पर वहां पहुंचे और उनके समारोह में बाधा पहुंचाने लगे।

स्थानीय निवासी और पेशे से वकील मुनाजिर ने ABP न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि मुसलमानों ने उनसे भी समारोह में शामिल होकर गणतंत्र दिवस मनाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने उनकी एक न सुनी और लगातार आपत्तिजनक नारे लगाने लगे।

मुनाजिर की मानें तो “उन्होंने (हिंदू संगठन के लोगों) ने तिरंगे का भी अपमान किया और हमने जो झंडा लगाया था उसे भी उखाड़ फेंका। जिस जगह तिरंगा फहराया जाना था वहां पे हमने रंगोली भी बनाया था। बाइक पर सवार उपद्रवियों ने उसे भी तहस नहस कर दिया। कुछ देर हमारे बीच कहासुनी हुई और उस के बाद वो वहां से चले गए और दूर जाकर मुसलमानों की दुकानों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया।”

राजनितिक विश्लेषक अमरेश मिश्रा लिखते हैं कि हिंसा में चन्दन गुप्ता की जो मौत हुई वो हिंदुत्व संगठनों से जुड़े लोगों द्वारा आपसी फायर का नतीजा था। उसी फायरिंग में नौशाद नामक एक मुस्लिम शख्स को भी गंभीर चोट आयी और वो इस समय अलीगढ के अस्पताल में भर्ती है।

जिस जगह मुसलमान तिरंगा फहराने के लिए इकठ्ठा हुए थे वो वीर अब्दुल हमीद त्राहा के नाम से मशहूर है। अब्दुल हमीद पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ते हुए शहीद हुए थे और शहीद होने से पहले उन्होंने पाकिस्तान के कई पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया था। मरणोपरांत उन्हें सेना के सबसे बड़े सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

बता दें कि कासगंज में गणतंत्र दिवस पर तिरंगा रैली के दौरान शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को भी सुबह-सुबह उपद्रवियों ने फिर आगजनी की। इन उपद्रवियों ने कासगंज की एक दुकान में आग लगा दी। बवाल के बाद जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं और धारा-144 लगा दी गई है। कासगंज जिले के मजिस्ट्रेट आरपी सिंह ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में 49 लोगों को गिरफ्तार किया है।

इससे पहले हिंदुत्ववादी ताक़तों ने शनिवार को अपना उपद्रव जारी रखा और कई बसों और दूसरी गाड़ियों सहित मुसलमानों की दुकानों को आग लगा दी। शनिवार की शाम से इलाक़े में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है। पुलिस ने इलाक़े की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

उधर सोशल मीडिया पर पत्रकारों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों ने कासगंज की हिंसा को बीजेपी द्वारा एक सुनियोजित घटना बताया है। ज़्यादातर लोगों का कहना है कि बीजेपी इसके ज़रिये अगले लोकसभा चुनाव से पहले वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है, क्योंकि विकास के नाम पर पिछले साढ़े तीन सालों में मोदी सरकार का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रही है।

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