उत्तर प्रदेश: धर्म परिवर्तन विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार दोनों भाई दो सप्ताह बाद जेल से रिहा, पुलिस को जांच के दौरान नहीं मिले सबूत

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पुलिस ने धर्म-परिवर्तन से संबंधित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 के तहत गिरफ्तार मुस्लिम युवक और उसके भाई को दो सप्ताह बाद आज (शनिवार को) जेल से रिहा कर दिया गया। यह मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले के कांठ कस्बे का है। जेल से बाहर निकलने के बाद युवक ने कहा कि मैं 15 दिन जेल में बिताने के बाद बाहर आया हूं और अब मुझे काफी राहत महसूस हो रही है।

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(फोटो: NDTV, गिरफ्तार युवक जेल से रिहा होने के बाद)

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को जांच के दौरान युवकों के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन के कोई सबूत नहीं मिले। युवक को उस वक्त गिकफ्तार किया गया था जब वह हिंदू युवती के साथ किए गए विवाह को रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज कराने पहुंचा था। जेल से निकलने के बाद युवक ने कहा कि इस विषय में अब मैं ज्यादा क्या कह सकता हूं। हमने आपसी सहमति से विवाह किया था। युवक ने कहा आज मैं 15 दिन जेल में बिताने के बाद बाहर आया हूं और अब मुझे काफी राहत महसूस हो रही है। जब युवक से कानून के गलत इस्तेमाल पर सवाल पूछा गया तो उसने जवाब देने से इनकार कर दिया।

बता दें कि, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हुआ था जिसमें कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ता जोड़े से पूछ रहे थे कि क्या युवती ने धर्म-परिवर्तन के अपने इरादे को लेकर स्थानीय जिलाधिकारी को अवगत कराया है? जोकि नए कानून के मुताबिक आवश्यक है।

गौरतलब है कि, पिछले महीने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी थी। अगर शादी के लिए जबरदस्ती धर्मांतरण के लिए दोषी ठहराया जाता है तो आरोपी को नए कानून के तहत 15,000 रुपये जुमार्ने के साथ एक से पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है।

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