गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: डॉ. कफील खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, योगी सरकार को निलंबन के बाद से लंबित बकाया भुगतान करने का आदेश

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में मरीज बच्चों की मौत के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सेवा से बर्खास्त किए गए डॉक्टर कफील खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर लगाते हुए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को निर्देश दिया है कि 7 जून तक डॉ. कफील के मामले में निर्णय लें और उनके बकाया देयकों का भुगतान करें।

डॉ. कफील ने अपने निलंबन को लेकर चल रही जांच को कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच 7 मार्च 2019 को 90 दिन में निलंबन मामले में डॉ. खान के खिलाफ चल रही जांच पूरी करने का आदेश दिया था। बता दें कि 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मासूम बच्चों की मौतों ने हर किसी को झकझोर रख दिया था। इस घटना में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजय किशन कौल ने ये फैसला सुनाया। डॉक्टर कफील की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्‍ठ अधिव‍क्‍ता मिनाक्षी अरोड़ा और फुजैल अयूबी एडवाकेट ऑन रिकड ने डॉक्टर कफील की ओर से याचिका दायर की थी।

डॉक्टर कफील खान को आक्सीजन कांड में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए दो सितंबर 2017 को निलंबित कर दिया गया था। इसके पहले उनके ऊपर केस दर्ज किया गया था। वह 2 सितंबर को गिरफ्तार हुए। आठ महीने से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद 25 अप्रैल 2018 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली और वह 28 अप्रैल की रात जेल से रिहा हुए।

क्या है पूरा मामला?

मालूम हो कि 10-11 अगस्त 2017 की रात को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध हालात में कम से कम 30 बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि एक सप्ताह के दौरान 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। आरोप था कि ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होना हादसे की वजह बना। हालांकि योगी सरकार ने इससे इनकार कर दिया था कि ऑक्सीजन की कमी मौतों का कारण बनी थी। इस घटना के दौरान कफील तब चर्चा में आए थे जब मीडिया में उन्हें बच्चों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाते हुए दिखाया गया था। हालांकि बाद में इसी मामले में उन्हें आरोपी भी बनाया गया और सस्पेंड कर दिया गया।

माना जा रहा है कि विभागीय जांच खत्‍म होने के बाद जल्‍द ही डॉक्टर कफील की बहाली हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति ने गत 20 अगस्त को सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा, ऑक्सीजन प्रभारी, एनेस्थिसिया बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर सतीश तथा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम बोर्ड के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉक्टर कफील खान तथा मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्तिकर्ता कंपनी पुष्पा सेल्स के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी।

 

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