लकड़ी के चूल्हे पर खाना पका रही बुजुर्ग महिला का वीडियो शेयर कर संबित पात्रा ने ‘उज्ज्वला योजना’ की खोली पोल! ट्विटर पर हुए ट्रोल

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ओडिशा के पुरी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी संबित पात्रा ने रविवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक गरीब परिवार के साथ उनके घर पर भोजन करते हुए वीडियो साझा किया। हालांकि, वीडियो शेयर करने के कुछ देर बाद ही उन्हें ट्विटर पर लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया। दरअसल, इस वीडियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकार की बहुचर्चित ‘पीएम उज्ज्वला योजना’ की सफलता पर किए गए दावों की पोल खोलकर दी है।

अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए संबित पात्रा ने लिखा, “पुरी के एक छोटे से गांव में रहने वाली एक बूढ़ी विधवा मां, उसकी तीन बेटियां जिनमें 2 दिव्यांग व बेटा मजदूरी करता है। ऐसी मां का घर बनाने का काम श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है।” उन्होंन एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “यह मेरा अपना परिवार है, मां ने खाना बनाकर खिलाया। मैंने अपने हाथों से इन्हें खाना खिलाया और मैं यह मानता हूं कि इनकी सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है।”

सोशल मीडिया पर लोग संबित पात्रा पर निशाना साध रहे हैं। यूजर्स पूछ रहे हैं कि आखिर उज्ज्वला योजना का क्या हुआ? जो एक बुजुर्ग विधवा महिला लकड़ी के चुल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है। नाना नाम के एक यूजर ने लिखा, “ये मां आज भी चूल्हे पर खाना पकाने को मज़बूर है। ये विधवा हैं और उनकी 2 बेटियां दिव्यांग हैं। उज्ज्वला योजना का क्या हुआ? विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन का क्या हुआ? तुम जैसे चौकीदारों के रहते किसने चोरी कर लिया इनका हक़?”

वहीं, राजेश नेगी ने बीजपी प्रवक्ता से महिला को एक गैस सिलेंडर दिलवाने की गुजारिश करते हुए लिखा है, “उज्वला योजना से गैस दिलवा देना- डॉ साहब”

कांग्रेस नेत्री और प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पत्रकार प्रशांत कुमार के वीडियो पर ट्वीट कर लिखा है कि क्या में धर्मेंद्र प्रधान जी को उज्जवला योजना का श्रेय दिया जाना चाहिए?” इसके साथ ही उन्होंने #EkHiChowikdarChorHai हैशटैग का इस्लेमाल किया है।

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने संबित पात्रा द्वारा शेयर किए वीडियो पर लिखा है, “नरेंद्र मोदी की उज्जवला योजना की सबसे बुलंद तस्वीर”

एक अन्य पत्राकर अनिल तिवारी ने बीजपी प्रवक्ता से ट्वीट कर पूछा, “उज्जवला योजना नही पहुंची?”

बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का दावा है कि ग्रामीण भारतीय इलाकों के करीब एक करोड़ घरों में घरेलू गैस सिलेंडर पहुंचाने की उसकी यह योजना बेहद कामयाब रही है और इसके चलते प्रदूषण फैलाने वाले घरेलू ईंधनों के इस्तेमाल में काफी कमी हुई है। पीएम मोदी अपनी चुनावी रैलियों में अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के पास गैस सिलेंडर और चूल्हे नहीं होने के कारण उन्हें धुएं में खाना पकाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, लेकिन उनकी सरकार ने उज्जवला योजना के जरिए उनकी परेशानियों को समाप्त कर दिया है।

अभी शनिवार को ही ओडिशा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने उज्ज्वला योजना के माध्यम से राज्य के 40 लाख घरों में धुएं से मुक्ति दिला कर गैस का चूल्हा देने का काम किया है। पीएम मोदी अक्सर उज्ज्वला योजना का जिक्र करते रहते हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर एक बार निशाना साधते हुए कहा था, “धुंआ क्या होता है, लकड़ी का चूल्हा कैसे जलता है ये नामदार (राहुल गांधी) की चार पीढ़ियों को कभी पता ही नहीं चला। मैने अपनी मां को लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाते देखा है, धुंए से आंखों से पानी कैसे निकलता है ये भी मैने देखा है, इसी से मुझे उज्ज्वला योजना शुरू करने की प्रेरणा मिली।”

दरअसल, जानकारों का कहना है कि मोदी सरकार की इस योजना के चलते रसोई गैस बड़ी संख्या में आम लोगों के घरों तक पहुंची है, लेकिन सरकार द्वारा किए जा रहे दावों पर अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं। वहीं, इस योजना में सबसे बड़ी मुश्किल है गैस सिलेंडर (एलपीजी) को रीफिल कराना। रीफिल करने की लागत को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में लोगों ने सिलेंडर का इस्तेमाल जारी नहीं रखा और परंपरागत ईंधन की ओर वापस लौट गए। मोदी सरकार ने 2016 में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने वाली अपनी महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की थी।

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