एक चौंकाने वाली जानकारी में यह बात सामने आई है कि सहारनपुर में हुई हिन्दु-मुस्लिम हिंसा के आरोपी और आपसी भाईचारें व सौहार्द को तोड़ने की कोशिश करने वाले भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा को न सिर्फ सहारनपुर में शोभा यात्रा निकालने की अनुमति थी बल्कि उनको स्थानीय दलित समुदाय द्वारा आमंत्रित भी नहीं किया गया था।
एनडीटीवी की खबर के अनुसार, स्थानीय दलित समुदाय मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में जुलूस नहीं निकालना चाहते थे उन्हें इसकी परमिशन भी नहीं थी। सहारनपुर में शोभायात्रा को इस मुस्लिम बहुल गांव में प्रवेश कराकर पुलिस के आदेशों का उल्लंघन किया गया था।
कथित तौर पर वीडियो में दिखाया गया है कि भाजपा सांसद गांव में जुलूस को प्रवेश करने के लिए एक भीड़ को संबोधित करते हैं, जहां पर उन्होंने यात्रा की अनुमति देने से इनकार करने के लिए सहारनपुर के वरिष्ठ अधीक्षक पुलिस (एसएसपी) लव कुमार के आवास पर हमला किया। वह भीड़ को आश्वस्त करते है कि लव कुमार को स्थानांतरित किया जाएगा।
गांव के दलित समुदाय के सदस्यों ने चैनल को बताया कि उनके पास से भाजपा सांसद को कोई आमंत्रण नहीं भेजा गया था। उनके अनुसार, उन्हें शोभा यात्रा में होने के लिए सांसद के एक प्रतिनिधि ने संपर्क किया था और वह भी इस शर्त के साथ कि वह शोभा यात्रा के लिए आवश्यक अनुमतियों को दिलवाएगें।
दुधली गांव के नरेश गौतम ने बताया था कि एक व्यक्ति (भाजपा से) आया था और हमारे साथ उसने बात की थी। हमने उन्हें बताया कि वह शोभा यात्रा केवल तभी करेंगे जब उन्हें अनुमति होगी। वे कह रहे थे कि वे यात्रा पूरी करेंगे। उनकी सरकार केंद्र में और राज्य में है।
शोभा यात्रा निकालने की भाजपा को आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के बाद, गांव के दलितों ने भी जिला प्रशासन को यह जानकारी दी कि वे 14 अप्रैल को डॉ. अम्बेडकर की याद में गांव में एक बैठक कर चुके थे और उन्हें दूसरी यात्रा की आवश्यकता नहीं थी। गौतम ने बताया कि हमनें अपनी बात को स्पष्ट कर दिया, अगर हमने ऐसा नहीं किया होता तो ये सारा दोष और समस्या हमारे सिर आ जाती।
पुलिस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 12 अप्रैल को यात्रा की अनुमति के लिए देवेन्द्र अग्रवाल नामक एक व्यक्ति का नाम सामने आता है जो विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़ा हुआ है। इस सभी नए तथ्यों के सामने आने से पता चलता है कि यह स्पष्ट है कि जबरन जुलूस को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में प्रवेश कराने और कानून और व्यवस्था के लिए एक खतरनाक स्थिति पैदा करने की योजना थी।
राघव लखनपाल शर्मा, जो एक धाराप्रवाह इंग्लिश स्पीकर हैं, पर स्थानीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लव कुमार ने अपने परिवार और बच्चों को धमकाने व उनके आधिकारिक निवास पर हिंसा का फैलाने के लिए भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया था। चूंकि भीड़ का नेतृत्व करते हुए बीजेपी सांसद शर्मा ने आश्वस्त किया था कि वह इस अधिकारी का स्थानांतरण यहां से करा देगें तो इस घोषणा के कुछ समय बाद ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लव कुमार को वहां से हटा दिया गया।
एसएसपी लव कुमार की पत्नी शक्ति कुमार ने 20 अप्रैल की घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि, ”मैं अलीगढ़, गोरखपुर, मुरादाबाद जैसे संवदेनशील जिलों में पति के साथ रही, लेकिन सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाने वाली एसएसपी कोठी पर ढाई घंटे तक जो मंजर मैंने देखा, उससे सहम गई हूं। मैंने अपने 6 और 8 साल के बच्चों की आंखों में जो खौफ देखा, उसे भूल नहीं सकती। पहले कभी वो इतनी जोर-जोर से चीखकर नहीं रोए, जितना उस शाम को।”
सहारनपुर में हिंसा और आगजनी के मामले में पुलिस ने बीजेपी सांसद राघव लखनपाल और देवबंद के बीजेपी विधायक बृजेश समेत दो दर्जन लोगों को नामजद किया था व इस मामले में दौ सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में दंगा करने और SSP के बंगले पर हमला करने के इल्जाम में पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था जबकि नामजद बीजेपी सांसद राघव लखनपाल, विधायक कुमार ब्रृजेश, सांसद के भाई राहुल और बीजेपी महानगर अध्यक्ष मनोज गगनेजा को हाथ भी नहीं लगाया गया था वहीं इस बारें में यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह का कहना था कि इस मामले में किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी।