रेयान इंटरनेशनल हत्याकांड: मीडिया अपने कीमती समय को बेचते हुए एक-दो दिन और इस खबर को दिखाएंगा और नेता सख्त कार्रवाई की बात करेंगे

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रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई 7 साल के मासूम की हत्या केवल एक मीडिया की खबरभर नहीं है बल्कि हमारे आस-पास सिस्टम में मौजूद उन सब लोगों पर एक इशारा है जो यौन उत्पीड़न की घटनाओं को अंजाम देते है। अगर हम सोचते है कि यह सिर्फ रेयान इंटरनेशनल स्कूल की बात है, हमारा बच्चा जिस स्कूल में जाता है वहां ऐसा कुछ नहीं हो सकता है तो यह हमारी गलतफहमी है।

अंग्रेजी मीडियम के बड़े ब्रांड वाले इस तरह के सभी स्कूल अच्छी शिक्षा के नाम पर बड़ा दिखावा करते है। बच्चों की सुरक्षा की गांरटी देते है। लेकिन पैसे के नशे में चूर इन स्कूलों का मैनेजमंेट सिस्टम यह भूल जाता है कि इस तरह के जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले लोग वहीं मौजूद होते है। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के मामले में सिर्फ स्कूलों तक ही बात सीमित नहीं है बल्कि हमारें घरों में काम करने वाले अन्य सर्विस स्टाफ की लायल्टी का पता आप कैसे लगा सकते है।

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पिछले दिनों सोशल मीडिया पर दुबई माॅल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें दिखाया गया था कि बच्चे की देखभाल करने वाला व्यक्ति ही उसके साथ गलत हरकत करता था, माॅल के कैमरे में बच्चे के साथ अश्लील हरकत करते हुए उसका वीडियो रिकार्ड हो गया। उस बच्चे के साथ यह कब से हो रहा था यह बात किसी को मालूम ही नहीं थी। जबकि बच्चे सोचते है ऐसी बात अपने अभिभावक को कैसे बताएं।

रेयान इंटरनेशल की इस हटना के बाद राजनीति का दौर शुरू हो चुका है। शिक्षा मंत्री सहित बीजेपी के अन्य नेताओं ने आश्वासन दिया है कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन क्या बीजेपी और शिक्षा मंत्री को स्कूलांे के उस सिस्टम में भी कोई खामी नज़र आती है या नहीं।

7 वर्षीय मासूम की हत्या के बाद स्कूल की प्रिंसिपल और अंजू मेडम बच्चे की मां ज्योति ठाकुर से मिलने उसने घर गई थी और बात को रफा-दफा करने की कोशिश की। स्कूल प्रशासन ने भी प्रिंसिपल को निलम्बित कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। इस बारे में अपनी सहमति जताते हुए मनोचिकित्सकों का कहना है कि बच्चों के साथ यौन शोषण करने वाले हमारे आसपास ही होते है लेकिन हमें उनके नज़रिये को पहचानने की जरूरत है।

आमतौर पर घरों में, स्कूलों में या अन्य ऐसी जगहों पर जो लोग काम करते है अगर वह यौन भावना से ग्रसित है तो अपने मोबाइल में ऐसी अश्लील वीडियो देखते है या फिर इस प्रकार का गंदा साहित्य पढ़ते है उसके बाद वह लोग अपनी इच्छाओं की पुर्ति के लिए अपना शिकार तलाश करते है। जब उन्हें कुछ नहीं मिलता तो वह आसपास मौजूद मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाते है। बहुत सारे मामलों पर बच्चों पर हुए यौन हमलों में यह एक सामान्य कारण पाया गया।

अपने कीमती समय को बेचते हुए मीडिया अगले एक या दो दिन और इस खबर को दिखाएंगा फिर उसके बाद कहीं कोई जिक्र इस बात का नहीं होगा। नेता भी रस्म को निभाते हुए अपनी घोषणाएं कर चुके है। लेकिन क्या सिस्टम में मौजूद इस गम्भीर समस्या के निदान के बारें में भी कहीं कोई चर्चा होती है।

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