2000 रुपये के नोटों की बंद हुई छपाई, अब केवल ये नोट छाप रही सरकार

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नकदी की बढ़ी मांग पूरी करने के लिए 500 रुपये के नोटों की छपाई तेज कर दी गई है। रोज 3,000 करोड़ रुपये कीमत के नोट छापे जा रहे हैं। वहीं, 2000 रुपये के नोटों की छपाई रोक दी गई है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने रविवार (6 मई) को कहा कि 500, 200 और 100 रुपये के नोट आम लोगों के बीच लेनदेन का माध्यम हैं। लोग इनका अधिक इस्तेमाल करते हैं। उन्हें 2,000 रुपये का नोट अधिक सुविधाजनक नहीं लगता है।

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समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि 500, 200 और 100 रुपये मूल्य के नोट लेनदेन में सुविधाजनक हैं और अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए 500 रुपये के नोटों की छपाई हर दिन 3000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि देश में कैश की स्थिति काफी अच्छी है और अतिरिक्त मांग भी पूरी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अब 2000 रुपये के नए नोटों की छपाई नहीं की जा रही है।

गर्ग ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी देश में ब्याज दरों को बढ़ाने को नहीं कह रही है, क्योंकि मुद्रास्फीति में असंगत वृद्धि या आउटपुट में असाधारण ग्रोथ नहीं है। सचिव ने कहा कि उन्होंने पिछले सप्ताह देश में कैश परिस्थिति का आकलन किया है और 85 फीसदी एटीएम काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर देश में यह (कैश उपलब्धता) काफी सामान्य है। उन्होंने कहा, ‘पर्याप्त कैश है और इसकी आपूर्ति की जा रही है। अतिरिक्त मांग भी पूरी हो रही है। मुझे नहीं लगता है कि इस समय कैश की कोई समस्या है।’

गर्ग ने कहा कि इस समय 2000 के 7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में हैं, जोकि पर्याप्त से अधिक हैं और इसलिए 2000 रुपये के नए नोट जारी नहीं किए जा रहे हैं। 500, 200 और 100 रुपये के नोट लोगों के बीच लेनदेन का माध्यम है। लोग 2000 रुपये के नोट को लेनदेन में बहुत सुविधाजनक नहीं मानते। 500 रुपये के नोटों की सप्लाइ पर्याप्त रूप से की जा रही है।

उन्होंने कहा कि हमने उत्पादन को प्रतिदिन 2,500-3000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है। गर्ग ने कहा कि रिजर्व बैंक करंसी नोट्स की सिक्यॉरिटी फीचर्स को बढ़ा रहा है ताकि नकल ना हो। पिछले 2.5 साल में देश में हाई क्वॉलिटी के नकली नोटों के मामले ना के बराबर सामने आए हैं, लेकिन आरबीआई नए फीचर्स की तलाश और अमल में लाने में जुटा रहता है।

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