पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ #Vikas_ગાંડો_થયો_છે, जानें क्या है इसका मतलब?

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वर्ष 2014 में अच्छे दिन लाने के वादे के साथ केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार अब आम आदमी की राह में खुद ही मुसीबत पैदा कर रही है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 2014 के मुकाबले आधी रह गई हैं। लेकिन इसका फायदा आम आदमी को नहीं मिल पा रहा है।  ज्यादातर राज्यों में पेट्रोल की कीमत 70 रुपये से पार हो गई है, जबकि डीजल का भाव 60 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। 13 सितंबर 2017 को दिल्ली में पेट्रोल 70.38 रुपये और डीजल 58.72 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए। जबकि मुंबई में पेट्रोल 79.48 रु. बिका।

दरअसल, इस साल 16 जून से पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में हर दिन बदलाव की व्यवस्था (डेली डाइनैमिक प्राइसिंग) लागू कर दी गई है। तब से पेट्रोल 7.48 प्रतिशत और डीजल 7.76 फीसदी महंगे हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि तीन साल में आखिर जब 46 फीसदी तक कच्चा तेल सस्ता हो चुका है तो इसका फायदा आम जनता को क्यों नहीं मिल रहा है?

उद्योग संगठन एसोचैम ने भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के पक्ष में है। एसोचैम द्वारा जारी नोट में कहा गया है, ‘जब कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल थी, तब देश में पेट्रोल 71.51 रुपये लीटर बेचा जा रहा था। अब कच्चे तेल की कीमत घटकर 53.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। उपभोक्ता तो यह पूछेंगे ही कि अगर बाजार से कीमतें निर्धारित होती हैं तो इसे 40 रुपये लीटर पर बेचा जाना चाहिए।’

सोशल मीडिया पर आक्रोश

पेट्रोल-डीजल के दाम में बेतहासा वृद्धि को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने तरीके से विरोध दर्ज करा रहे हैं।आम आदमी इस बात से परेशान है कि आखिर तेल कंपनियों को इतनी जल्दबाजी क्यों है? आखिर क्या कारण हैं, जिनके चलते पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ाई जा रही हैं? सरकार आम आदमी की जेब का ख्याल क्यों नहीं रख रही है? क्या सरकार आम आदमी के बारे में सोचना भूल गई है? ऐसे कई सवालों के साथ हर दिन सोशल मीडिया पर बढ़ती कीमतों के खिलाफ अगल-अलग ट्रेंड हो रहा है।

सोमवार से ट्विटर पर #Vikas_ગાંડો_થયો_છે ट्रेंड हो रहा है। हालांकि इस ट्रेंड में ‘विकास’ को छोड़ बाकी शब्द गुजराती में है जिस वजह से हिंदी भाषी राज्य के लोग इसका मतलब नहीं समझ पा रहे हैं, लेकिन इस ट्रेंड पर क्लिक करने के बाद आपको इस बात का अहसास हो जाएगा कि लोगों में बढ़ती महंगाई को लेकर कितनी नाराजगी है। दरअसल, #Vikas_ગાંડો_થયો_છે का मतलब होता है ‘विकास पागल हो चुका है।’ इस ट्रेंड के जरिए लोग जमकर मजे ले रहे हैं।

देखिए, कुछ मजेदार ट्वीट:-

https://twitter.com/KPadmaRani1/status/910009592775503873

 

 

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