पाकिस्तान ने पत्नी को कुलभूषण जाधव से मिलने की दी इजाजत

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भारत और अंतरराष्ट्रीय दवाब के सामने झुकते हुए पाकिस्तान ने जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को उनकी पत्नी से मुलाकात की अनुमति दे दी है। कुलभूषण को कथित तौर पर जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है। बता दें कि कुलभूषण को कथित जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।

File Photo- कुलभूषण जाधव

शुक्रवार (10 नवंबर) को पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को मौखिक रूप से इसकी जानकारी दे दी। इसका मतलब है कि अब कुलभूषण जाधव अपनी पत्नी से मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकते हुए पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को उनकी पत्नी से मिलने की अनुमति दी है।

पाक विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल ने शुक्रवार (10 नवंबर) को कहा कि सरकार ने कुलभूषण जाधव और उनकी पत्नी की मुलाकात के इंतजाम किए हैं। यह पूरी तरह से मानवीयता के आधार पर उठाया गया एक कदम है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चयोग को मौखिक रूप से इसकी जानकारी दे दी गई है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि कुलभूषण जाधव भारतीय नागरिक हैं और वे नौसेना के रिटायर्ड कमांडर हैं। 3 मार्च 2016 को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने उन्हें अवैध तरीके से पाकिस्तान में घुसने और जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 10 मार्च को भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को रॉ का एजेंट बताकर मौत की सजा सुना दी।

उन्हें जासूसी करने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया गया है। आनन-फानन में पाक सेनाध्यक्ष ने जाधव की सजा-ए-मौत पर मुहर भी लगा दी। पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई सेंटर- द इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत सभी आरोपों में दोषी पाया।

आईएसपीआर ने कहा कि जाधव भारतीय नौसेना के कमांडर हैं और उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कबूल किया है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

जाधव पर पाक ने आरोप लगाया है कि वह बलूचिस्तान और कराची जैसी जगहों पर अशांति फैलाकर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने और उसे अस्थिर करने की रणनीति के तहत काम कर रहे थे। पाक ने सैन्य अदालतों का गठन देश में आतंकी घटनाओं में लिप्त आतंकियों के खिलाफ जल्द सुनवाई के लिए किया था।

लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से भारतीय नागरिक जाधव के खिलाफ सैन्य कोर्ट में गुपचुप तरीके से केस चलाया गया। उन्हें बिना कोई कानूनी सहायता उपलब्ध कराए फांसी की सजा सुना दी गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को बचाव में वकील मुहैया कराया गया था।

बता दें कि भारत सरकार ने इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट में पहुंचा दिया है। 18 मई को इस मामले की सुनवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत की 10 सदस्यीय पीठ ने जाधव को फांसी की सजा पर अमल पर रोक लगा दी थी।

 

 

 

 

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